Zero Tolerance Against Drugs: डीएम आशीष चौहान का बड़ा अभियान, GIS से होगी हॉटस्पॉट की पहचान

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Dehradun DM Launches Zero-Tolerance Anti-Drug Drive with GIS Hotspot Mapping

ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस: युवाओं का भविष्य बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता, हॉटस्पॉट पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक – डीएम डॉ. आशीष चौहान

जीआईएस मैपिंग से चिन्हित होंगे ड्रग्स हॉटस्पॉट, सप्लाई चेन तोड़ने को संयुक्त अभियान
स्कूलों में एंटी-ड्रग्स, साइबर और वित्तीय अपराध की शिक्षा, हॉस्टल-पीजी में बढ़ेगी सीसीटीवी निगरानी
नशा मुक्ति केंद्रों की होगी सख्त मॉनिटरिंग, मानक तोड़ने वालों पर होगी सीलिंग की कार्रवाई

समीक्षा में सामने आए महत्वपूर्ण आंकड़े

बैठक में विभिन्न विभागों ने कार्रवाई और उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया—

  • जिले में 84 पंजीकृत एवं 2 अपंजीकृत नशा मुक्ति केंद्र चिन्हित किए गए।
  • भौतिक सत्यापन के दौरान 23 केंद्र बंद पाए गए।
  • 15 केंद्रों में अनियमितताएं मिलने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई।
  • 55 केंद्रों की निरीक्षण रिपोर्ट राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजी जा चुकी है।
  • वर्ष 2026 में अब तक 151 एनडीपीएस मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए।
  • 170 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
  • उच्च शिक्षण संस्थानों में चलाए गए ड्रग्स टेस्टिंग अभियान के तहत 711 संदिग्ध छात्रों के नमूने लिए गए, जिनकी सभी रिपोर्टें नकारात्मक आईं।
  • जिले के सभी मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य कर दिए गए हैं।
  • फार्मासिस्ट की अनुपस्थिति में दवाओं की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है।
  • हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है।
  • रायवाला स्थित राजकीय नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र वर्तमान में 15 बेड क्षमता के साथ संचालित है, जिसे 30 बेड तक विस्तारित करने की स्वीकृति मिल चुकी है।

देहरादून, 24 जुलाई 2026।
जनपद देहरादून में नशे के बढ़ते खतरे पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक और बहु-आयामी रणनीति तैयार की है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शुक्रवार को आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (NCORD) की बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि “ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। हर युवा का भविष्य सुरक्षित रखना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज, परिवार और आने वाली पीढ़ी के भविष्य की रक्षा का अभियान है। इसके लिए सभी विभागों को समन्वित, परिणामोन्मुख और तकनीक आधारित कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

जीआईएस तकनीक से होगी ड्रग्स हॉटस्पॉट की पहचान

बैठक में जिलाधिकारी ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि पिछले वर्षों के अपराध आंकड़ों का जीआईएस (Geographic Information System) के माध्यम से विश्लेषण कर जिले के ड्रग्स हॉटस्पॉट और संवेदनशील क्षेत्रों की वैज्ञानिक पहचान की जाए। चिन्हित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर सर्जिकल स्ट्राइक की जाएगी।

उन्होंने कहा कि चाय-तंबाकू की दुकानों, मेडिकल स्टोर्स, झुग्गी-बस्तियों तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर नियमित निगरानी रखी जाए और संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ई-ड्रग्स और केमिकल ड्रग्स पर विशेष फोकस

जिलाधिकारी ने युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहे ई-ड्रग्स और केमिकल ड्रग्स के चलन पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह नई पीढ़ी के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। उन्होंने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), औषधि विभाग और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को संयुक्त अभियान चलाकर ड्रग्स की पूरी सप्लाई चेन ध्वस्त करने के निर्देश दिए।

शिक्षा संस्थानों में चलेगा व्यापक जागरूकता अभियान

बैठक में निर्णय लिया गया कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियमित पाठ्यक्रम के साथ-साथ एंटी-ड्रग्स जागरूकता, साइबर अपराध और वित्तीय अपराध से संबंधित विषयों को भी शामिल किया जाएगा।

इसके अलावा छात्रावासों, पीजी आवासों, कोचिंग संस्थानों तथा अन्य संवेदनशील परिसरों में सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। जिलाधिकारी ने एंटी-ड्रग्स हेल्पलाइन 1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए ताकि नागरिक बिना भय के शिकायत दर्ज करा सकें।

नशा मुक्ति केंद्रों की होगी सख्त निगरानी

डीएम ने सभी उप जिलाधिकारियों (SDM) को जिले में संचालित सभी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और उनके संचालन को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी केंद्र में गंभीर अनियमितता या मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसे तत्काल सील किया जाए।

साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सेलाकुई में 30 बेड क्षमता वाले नए नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की स्थापना हेतु शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए गए। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों के विरुद्ध भी विशेष अभियान चलाकर कार्रवाई करने को कहा गया।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृत परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, उच्च शिक्षा विभाग से डॉ. दीपा मेहरा रावत, पुलिस क्षेत्राधिकारी जगदीश पंत, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, ड्रग्स इंस्पेक्टर विनोद जगूड़ी, एआरटीओ रत्नाकर सिंह, एसीएफ अभिषेक मैठाणी, आईबी से रणवीर सिंह चौहान, जिला आबकारी विभाग से शिव प्रसाद व्यास, जिला शिक्षा अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।