Dehradun Anti-Drug Drive: Special Workshops in Colleges
नशामुक्ति अभियान को गति देने के लिए शिक्षण संस्थानों में होंगी विशेष कार्यशालाएं
Dehradun administration will hold special anti-drug workshops in universities and colleges. DM Dr Ashish Chauhan directed 100% student e-pledges by October 18.
डीएम डॉ. आशीष चौहान ने 18 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत विद्यार्थियों को ई-शपथ दिलाने के दिए निर्देश

देहरादून। युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और मादक पदार्थों के सेवन की रोकथाम के लिए देहरादून जिला प्रशासन ने शिक्षण संस्थानों में नशामुक्ति जागरूकता गतिविधियों को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में मंगलवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में जनपद के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ बैठक आयोजित की गई।
बैठक में जिलाधिकारी ने सभी शासकीय एवं अशासकीय विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में नशामुक्ति विषय पर विशेष जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को मादक पदार्थों के सेवन से दूर रखने के लिए केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करते हुए उन्हें नशे के दुष्प्रभावों और उससे बचाव के उपायों की वैज्ञानिक जानकारी भी उपलब्ध कराना जरूरी है।
18 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत ई-शपथ का लक्ष्य
डीएम ने सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देशित किया कि 18 अक्टूबर तक शत-प्रतिशत विद्यार्थियों को ई-शपथ दिलाई जाए। उन्होंने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप प्रत्येक विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में एंटी ड्रग्स कैंपस कमेटी का गठन सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षण संस्थानों के परिसरों में अधिक से अधिक नशामुक्ति कार्यशालाएं आयोजित की जाएं। इन कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्प्रभावों के बारे में तथ्यात्मक एवं वैज्ञानिक जानकारी दी जाए, ताकि युवा नशे से जुड़े जोखिमों को समझ सकें और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित हों।
विद्यार्थियों को परामर्श और सहायता संसाधनों की जानकारी देने पर जोर
जिलाधिकारी ने कहा कि नशे की प्रवृत्ति से बचाव के साथ-साथ जरूरतमंद विद्यार्थियों को परामर्श एवं सहायता के उपलब्ध संसाधनों की जानकारी भी दी जानी चाहिए। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में एंटी ड्रग्स गतिविधियों को नियमित शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया।
उन्होंने मानस हेल्पलाइन-1933 के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों को नशे से संबंधित समस्याओं अथवा सहायता की आवश्यकता होने पर उपलब्ध सहायता व्यवस्था की जानकारी मिल सके।
नशामुक्त समाज के निर्माण में शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका
डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण, सकारात्मक सोच और स्वस्थ भविष्य की नींव तैयार करने वाले महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ऐसे में नशामुक्त समाज के निर्माण में शिक्षण संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से नशामुक्ति कार्यशालाओं को प्रभावी, सहभागितापूर्ण और परिणामोन्मुख बनाने तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इन गतिविधियों से जोड़ने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों तक सही जानकारी पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें नशे के विरुद्ध सकारात्मक वातावरण तैयार करने में सहभागी बनाना होना चाहिए।
बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने नशामुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने के संबंध में अपने सुझाव भी साझा किए।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, एसडीएम रविन्द्र ज्वांठा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. दीपा मेहरा रावत, नोडल अधिकारी रंजना सैनी, सीआईएमएस ग्रुप के अध्यक्ष एडवोकेट ललित मोहन जोशी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।






