Uttarakhand Rain Alert: उत्तराखंड के 5 जिलों में 30 अक्टूबर को ऑरेंज अलर्ट, भारी बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी

0
15

Uttarakhand Weather Alert: Orange Alert for 5 Districts

 

उत्तराखंड के पांच जिलों में 30 अक्टूबर को ऑरेंज अलर्ट, आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर

 

Uttarakhand issues an orange alert for five districts on October 30, warning of heavy rain, hailstorms, lightning and strong winds. Authorities review safety measures.

 

नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली में आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि व तेज हवाओं की चेतावनी; चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष सतर्कता के निर्देश

 

देहरादून। उत्तराखंड में मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को पांच जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने, ओलावृष्टि होने तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चम्पावत में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की आशंका भी जताई गई है।

मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने संबंधित जनपदों के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी विभागों और जिला प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने तथा संभावित आपदा से निपटने के लिए आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने भी सचिव से वार्ता कर आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी सुरक्षात्मक उपाय करने को कहा।

 

चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष सतर्कता

सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए सभी जनपदों में आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाएं सक्रिय रखी जाएं। चारधाम यात्रा मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि खराब मौसम या किसी संभावित खतरे की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका जाए।

संबंधित अधिकारी यात्रा मार्गों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखें और परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक निर्णय लें। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही के दौरान भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है, ताकि मौसम बिगड़ने पर किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

 

संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट रहें विभाग

सचिव ने निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। आपदा प्रबंधन व्यवस्था के तहत तैनात अधिकारियों और विभागीय नोडल अधिकारियों को अलर्ट रहने तथा किसी भी घटना की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में खराब मौसम के दौरान भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़क मार्ग बाधित होने जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD), राष्ट्रीय राजमार्ग, सीमा सड़क संगठन (BRO) और अन्य संबंधित कार्यदायी संस्थाएं अपनी मशीनरी एवं आवश्यक संसाधन तैयार रखें।

सड़क मार्ग बाधित होने की स्थिति में संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई कर यातायात बहाल करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि स्थानीय निवासियों, यात्रियों और पर्यटकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखने के निर्देश

विनोद कुमार सुमन ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा जाए। उन्होंने आमजन से मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की।

उन्होंने लोगों को नदी-नालों, जलधाराओं और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। किसी भी आपात स्थिति या आपदा संबंधी घटना की सूचना राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के टोल फ्री नंबर 1070 पर देने की अपील की गई है।

सचिव ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर सभी संबंधित विभागों और जनपदों को पूरी तत्परता तथा आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा, ताकि किसी भी संभावित आपदा की स्थिति में प्रभावी और त्वरित कार्रवाई की जा सके।

बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा, मोहित माथुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

ओलावृष्टि से प्रभावित लोगों को जल्द मिलेगी सहायता

बैठक में सचिव विनोद कुमार सुमन ने ओलावृष्टि से हुए नुकसान के कारण प्रभावित लोगों को राहत उपलब्ध कराने के लिए संबंधित जनपदों से आवश्यक मांग और प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रभावितों को सहायता देने के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता है, तो मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता प्राप्त करने के लिए औपचारिक प्रस्ताव तत्काल प्रस्तुत किए जाएं।

उन्होंने रिकवरी एंड रिकंस्ट्रक्शन के तहत आवश्यक धनराशि की मांग से संबंधित प्रस्ताव भी जल्द भेजने को कहा। सचिव के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने प्रस्ताव भेजने में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए प्रभावितों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने को कहा, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्बहाली के कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जा सकें।

 

चीड़बासा में पत्थर गिरने की समस्या के समाधान के लिए मांगा प्रस्ताव

बैठक में चीड़बासा क्षेत्र में पहाड़ी से पत्थर गिरने की समस्या पर भी चर्चा हुई। सचिव ने संबंधित अधिकारियों को यात्रियों और आमजन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों का प्रस्ताव जल्द तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए।

उन्होंने विशेष रूप से पत्थर गिरने से बचाव के लिए सुरक्षा जाल (नेटिंग) लगाने संबंधी प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने को कहा, ताकि आवश्यक स्वीकृति मिलने के बाद सुरक्षा उपायों पर आगे की कार्रवाई की जा सके।