उच्च शिक्षा में बड़े सुधार की तैयारी, सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को 5 साल का रोडमैप बनाने के निर्देश

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Uttarakhand Higher Education Reforms: Universities to Prepare 5-Year Plans, Focus on NAAC & NIRF Rankings

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप ढलेंगे उत्तराखंड के विश्वविद्यालय, मुख्य सचिव ने दिए 5 वर्षीय रोडमैप और गुणवत्ता सुधार के निर्देश

देहरादून।
उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश के विभिन्न सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत गुणवत्ता, रैंकिंग, शोध, कौशल विकास तथा विद्यार्थियों के समग्र विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख बनाया जाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को समयबद्ध कार्ययोजना के साथ आवश्यक सुधार लागू करने के निर्देश दिए।

सभी सरकारी विश्वविद्यालय तैयार करेंगे 5 वर्षीय विकास योजना

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक सरकारी विश्वविद्यालय को आगामी पांच वर्षों का व्यापक विकास रोडमैप तैयार करना होगा। इस योजना में शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध गतिविधियों, डिजिटल शिक्षा, आधारभूत संरचना, नवाचार, उद्योग सहयोग, प्लेसमेंट तथा विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने दीर्घकालिक विकास के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने होंगे, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत हो सके।

NAAC और NIRF रैंकिंग पर विशेष फोकस

बैठक में मुख्य सचिव ने सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को NAAC (National Assessment and Accreditation Council) से उच्च गुणवत्ता मान्यता प्राप्त करने तथा NIRF (National Institutional Ranking Framework) रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को गुणवत्ता सुधार के लिए अल्पकालीन, मध्यकालीन और दीर्घकालीन कार्ययोजना तैयार करनी होगी, जिससे शैक्षणिक उत्कृष्टता के सभी मानकों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

11 विश्वविद्यालयों के लिए बनेगा मूल्यांकन एवं रैंकिंग तंत्र

मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी 11 सरकारी विश्वविद्यालयों के लिए एक प्रभावी मूल्यांकन एवं रैंकिंग मैकेनिज्म विकसित करने के निर्देश दिए। इसके माध्यम से विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने सभी सरकारी एवं सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों के लिए अगले 8 से 10 दिनों के भीतर राज्य स्तरीय रैंकिंग पैरामीटर तैयार करने का कार्य सौंपा। इन मानकों के आधार पर कॉलेजों की गुणवत्ता, शैक्षणिक उपलब्धियों और संस्थागत प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।

विद्यार्थियों के लिए बनेगा ट्रेसिंग मैकेनिज्म

मुख्य सचिव ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति एवं रोजगार की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए स्टूडेंट ट्रेसिंग मैकेनिज्म विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उनकी उच्च शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और अन्य उपलब्धियों का डेटा उपलब्ध कराएगी, जिससे पाठ्यक्रमों की प्रभावशीलता का बेहतर मूल्यांकन किया जा सकेगा।

इंटर्नशिप और उद्योग से जुड़ाव पर जोर

उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए इंटर्नशिप, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) तथा सामाजिक संस्थाओं के साथ मजबूत सहभागिता विकसित की जानी चाहिए।

मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालयों को उद्योग जगत के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि उनकी रोजगार क्षमता और कौशल विकास को बढ़ावा मिल सके।

विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण पर भी रहेगा फोकस

बैठक में मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालयों में विदेशी भाषाओं के शिक्षण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर रोजगार एवं उच्च शिक्षा के अवसरों को देखते हुए विद्यार्थियों को विदेशी भाषाओं का ज्ञान उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को भी उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ समन्वय बनाकर सक्रिय भूमिका निभानी होगी, ताकि बहुविषयक शिक्षा और व्यावसायिक कौशल को बढ़ावा दिया जा सके।

बैठक में रहे उपस्थित

बैठक में सचिव डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, अपर सचिव मनुज गोयल, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. दीवान एस. रावत, प्रो. नवीन चंद्र लोहानी, प्रो. एन.के. जोशी, प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।