Uttarakhand Disaster: केंद्रीय टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का किया व्यापक निरीक्षण, राहत पैकेज जल्द

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अंतर-मंत्रालयीय केंद्रीय टीम का राज्य के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक स्थलीय एवं हवाई निरीक्षण

यूएसडीएमए में की उच्चस्तरीय बैठक, प्रभावित जिलों में क्षति, पुनर्वास व राहत कार्यों का लिया जायजा

देहरादून। उत्तराखंड में अतिवृष्टि और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत मूल्यांकन करने के लिए भारत सरकार की अंतर-मंत्रालयीय केंद्रीय टीम ने सोमवार को कई जनपदों का दौरा किया। टीम ने प्रभावित जिलों में जाकर स्थलीय और हवाई निरीक्षण किया, स्थानीय प्रशासन एवं आपदा प्रभावित नागरिकों से संवाद किया तथा नुकसान और राहत की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।

टीम के दौरे की शुरुआत राजधानी देहरादून से हुई, जहां राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने आपदाओं से हुई क्षति, प्रभावित क्षेत्रों, पुनर्वास कार्यों और राहत जरूरतों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण (PPT) दिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक वर्षा दर्ज हुई, जिसके कारण कृषि, बागवानी, पर्यटन, व्यापार और आजीविका पर व्यापक असर पड़ा है। उन्होंने केंद्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के सतत प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।

बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) डीआईजी राजकुमार नेगी, वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओबेदुल्लाह अंसारी समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पहली टीम उत्तरकाशी पहुंची, धराली-हर्षिल के हालात देखे

संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में पहली टीम ने उत्तरकाशी जनपद के धराली-हर्षिल सहित मुखबा जैसे आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। टीम सुबह करीब 11 बजे आर्मी हैलीपैड, हर्षिल पहुंची, जहां जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने परिसंपत्तियों और जनहानि से जुड़े विस्तृत आंकड़े साझा किए।

टीम ने प्रभावित गांवों में जाकर मकानों, होटलों, बागानों, फसलों और व्यवसायों को हुए नुकसान का जायजा लिया। प्रभावित नागरिकों ने टीम के समक्ष पुनर्वास, रोजगार, पुनर्स्थापन और क्षतिपूर्ति को लेकर अपनी मांगें रखीं। निरीक्षण के दौरान सड़कों, पुलों, विद्युत एवं जल आपूर्ति, सार्वजनिक भवनों समेत बुनियादी ढांचे और कृषि व पशुधन पर पड़े असर का भी आकलन किया गया।

संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना ने कहा कि टीम स्थानीय प्रशासन के सहयोग से प्रभावितों की संपत्ति, आजीविका और फसलों के नुकसान का ब्योरा एकत्र कर रही है। इस आधार पर केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसके बाद राहत पैकेज की घोषणा होगी।

टीम में निदेशक (वित्त) शैलेश कुमार, मुख्य अभियंता पंकज सिंह और उपनिदेशक विकास सचान शामिल थे।

दूसरी टीम ने चमोली के थराली क्षेत्र का लिया जायजा

निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह के नेतृत्व में दूसरी टीम ने चमोली जनपद के थराली क्षेत्र का स्थलीय व हवाई सर्वेक्षण किया। टीम ने चेपड़ो, कोटडीप, इराड़ीबगड़, देवाल के मोपाटा और नंदानगर जैसे प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

कुलसारी राहत केंद्र में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने विभागवार क्षति विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि लगातार बारिश और भूस्खलन से सड़कों, पुलों, भवनों, पेयजल योजनाओं, विद्युत तंत्र और कृषि को भारी नुकसान पहुंचा है। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट चुका है, कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और कुछ परिवारों को विस्थापित करना पड़ा है।

स्थानीय निवासियों से बातचीत में टीम ने स्थिति की गंभीरता जानी। डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका दौरा वास्तविक क्षति के आकलन और केंद्र को यथार्थवादी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि शीघ्र राहत व पुनर्निर्माण योजनाएं लागू की जा सकें।

टीम में अनु सचिव शेर बहादुर और अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार शामिल रहे।

मंगलवार को अन्य प्रभावित जिलों का होगा निरीक्षण

मंगलवार को आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में उत्तरकाशी गई टीम रुद्रप्रयाग और पौड़ी-गढ़वाल के प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। वहीं, डॉ. वीरेन्द्र सिंह की टीम बागेश्वर और नैनीताल के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेगी।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि दोनों टीमें मंगलवार शाम तक देहरादून लौट आएंगी। इस निरीक्षण कार्य में यूएलएमएमसी के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार और सलाहकार डॉ. मोहित पूनिया नोडल अधिकारी के रूप में टीम के साथ हैं।