CM Dhami reviews employment schemes, stresses youth skill development and self-employment.

मुख्यमंत्री ने रोजगार एवं स्वरोजगार योजनाओं की समीक्षा की
युवाओं के कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर
पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का समय पर और पूर्ण लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश
DEHRADUN: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को सचिवालय में कृषि, पशुपालन, पर्यटन एवं उद्योग से जुड़ी विभिन्न रोजगार एवं स्वरोजगार योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत योजनाओं की जानकारी आमजन तक प्रभावी ढंग से पहुँचाई जाए, ताकि पात्र लोग समय पर इनका लाभ उठा सकें। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और आवंटित बजट का पूर्ण आउटकम सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने युवाओं के कौशल विकास को प्राथमिकता देते हुए कहा कि उन्हें स्वरोजगार के लिए अधिकतम अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए रोजगार सृजन की दिशा में ठोस और त्वरित कदम उठाएं। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का पूरा लाभ समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठकों के कार्यवृत्त को उन्नति पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करने के निर्देश भी दिए। सेब की अतिसघन बागवानी योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, इसलिए इसके निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा किया जाए। साथ ही किसानों से संबंधित सभी देयकों का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने राज्य में कीवी उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया, ताकि किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं। हनी मिशन के अंतर्गत शहद उत्पादन को और अधिक प्रोत्साहित किया जाए तथा राज्य में उत्पादित शहद का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन सुनिश्चित किया जाए। बागवानी एवं मौन पालन के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रहे राज्यों के अध्ययन के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीमें भेजने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश के अब तक 29 उत्पादों को जी.आई. टैग प्राप्त हो चुका है, जिनमें से 18 कृषि एवं कृषि कल्याण से संबंधित हैं। चालू वर्ष में 25 अन्य उत्पादों को जी.आई. टैग के लिए चिन्हित किया जाएगा।
राज्य में 134 करोड़ रुपये की लागत से लागू स्टेट मिलेट पॉलिसी के तहत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी एवं चीना को शामिल किया गया है। प्रथम चरण में 24 विकासखंडों के 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल को तथा द्वितीय चरण में 44 विकासखंडों के 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल को आच्छादित किया गया है। प्रथम चरण में 5 हजार से अधिक गांवों को कवर करते हुए लगभग डेढ़ लाख किसानों को लाभान्वित किया गया है। मिलेट फसलों की खरीद के लिए 216 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं और सहकारिता विभाग के अंतर्गत 20 करोड़ रुपये का रिवाल्विंग फंड भी बनाया गया है। इस वित्तीय वर्ष में 5 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 5,386 मीट्रिक टन मिलेट फसलों की खरीद की जा चुकी है।
बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के अंतर्गत बीते चार वर्षों में 32 हजार के लक्ष्य के मुकाबले 33,620 लाभार्थियों को 202.72 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। आगामी वर्ष में 9 हजार नए लाभार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
पर्यटन विभाग के अंतर्गत दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत चार वर्षों में 780 होम स्टे स्थापित किए गए हैं, जिनके लिए 188.58 करोड़ रुपये का वित्त पोषण किया गया। वहीं वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के अंतर्गत चार वर्षों में एक हजार से अधिक लोगों को लाभान्वित करते हुए 105 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत राज्य में मत्स्य पालन क्षेत्र में 17,450 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।
बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज एवं गणेश जोशी, प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर, विनय शंकर पाण्डेय, एस.एन. पाण्डेय, वी. षणमुगम, धीराज गर्ब्याल सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।





