उत्तराखण्ड में अर्ली वार्निंग सिस्टम होगा मजबूत, जनपदों में लगेंगे एडब्ल्यूएस और डॉप्लर रडार

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Uttarakhand Early Warning System Strengthened | AWS & Doppler Radar Installation for Disaster Management

उत्तराखण्ड में अर्ली वार्निंग सिस्टम होगा और सशक्त, जनपदों में लगेंगे एडब्ल्यूएस और डॉप्लर रडार

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार उत्तराखण्ड में आपदा प्रबंधन तंत्र को आधुनिक तकनीक से सुदृढ़ करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। राज्य में आपदा जोखिम कम करने तथा समय पर सटीक चेतावनी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अर्ली वार्निंग सिस्टम को और मजबूत बनाया जा रहा है। आगामी महीनों में विभिन्न जनपदों में अत्याधुनिक मौसम निगरानी उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिससे संभावित आपदाओं की पूर्व सूचना मिल सके और जनहानि व आर्थिक नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने जानकारी देते हुए बताया कि रक्षा भू-स्थानिक अनुसंधान प्रतिष्ठान Defence Geoinformatics Research Establishment (डीजीआरई) द्वारा राज्य के 10 जनपदों में ऑटोमेटेड वेदर स्टेशन (एडब्ल्यूएस) स्थापित किए जाएंगे। इनमें सर्वाधिक आठ एडब्ल्यूएस उत्तरकाशी और टिहरी जनपद में लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त पौड़ी में सात, देहरादून में पांच, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में तीन-तीन, अल्मोड़ा में दो तथा नैनीताल और हरिद्वार में एक-एक एडब्ल्यूएस स्थापित किए जाएंगे। इन स्टेशनों से मौसम संबंधी सटीक और त्वरित आंकड़े प्राप्त होंगे, जिससे समय रहते चेतावनी जारी की जा सकेगी।

इसी क्रम में भारत मौसम विज्ञान विभाग India Meteorological Department (आईएमडी) द्वारा देहरादून, अल्मोड़ा, चम्पावत और चमोली में से तीन जनपदों में डॉप्लर वेदर रडार लगाए जाएंगे। डॉप्लर रडार के माध्यम से वर्षा, बादलों की गतिविधि और मौसम की स्थिति पर रियल टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे आपदा पूर्वानुमान क्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी। संबंधित जिलों को भूमि चयन कर शीघ्र प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।


समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन की व्यापक समीक्षा

शनिवार को राज्य के सभी 13 जनपदों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास ने आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने भारत सरकार के NDMIS Portal (एनडीएमआईएस) पोर्टल पर आपदा मद में हुए व्यय का पूरा विवरण समयबद्ध रूप से अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि डेटा का नियमित अपडेट योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में आपदाओं के दौरान लापता व्यक्तियों को मृत घोषित किए जाने से जुड़े लंबित मामलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजे जाएं ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर राहत मिल सके। वर्ष 2025 की आपदाओं में मृत नेपाली मूल के लोगों को आर्थिक सहायता तथा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित मामलों पर भी चर्चा हुई और लंबित प्रकरणों की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए गए।


सभी उपकरणों की होगी जीआईएस मैपिंग

राज्य में आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों और उपकरणों की जीआईएस आधारित मैपिंग की जाएगी। इसके लिए जनपदों एवं विभागों को IDRN Portal (आईडीआरएन) पोर्टल पर उपलब्ध उपकरणों का पूर्ण विवरण शीघ्र अपलोड करने को कहा गया है। मानसून से पूर्व यह कार्य पूर्ण होने पर आपदा के समय संसाधनों की तत्काल जानकारी उपलब्ध हो सकेगी और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी आएगी।


हर जनपद में स्थापित होगा डीडीआरएन नेटवर्क

आपदा के दौरान संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए रुद्रप्रयाग मॉडल की तर्ज पर अन्य जिलों में भी डिजास्टर डेडिकेटेड रेडियो नेटवर्क (डीडीआरएन) स्थापित किया जाएगा। यह सुरक्षित और लंबी दूरी तक कार्य करने वाला संचार नेटवर्क है, जिसमें हाई-स्पीड इंटरनेट, वॉयस और वीडियो कम्युनिकेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मोबाइल या इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की स्थिति में यह नेटवर्क प्रशासन, आपातकालीन सेवाओं और राहत एजेंसियों के बीच निर्बाध संपर्क बनाए रखने में सहायक होगा।


तहसील स्तर तक पहुंचेगी आपदा प्रबंधन व्यवस्था

राज्य में आपदा प्रतिक्रिया प्रणाली को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए अब तहसील स्तर पर भी आपातकालीन परिचालन केंद्र (टीईओसी) स्थापित किए जाएंगे। जिस प्रकार राज्य स्तर पर एसईओसी और जनपद स्तर पर डीईओसी कार्यरत हैं, उसी प्रकार टीईओसी के माध्यम से स्थानीय स्तर पर त्वरित समन्वय और प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाएगी। तहसीलों को आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किए जा सकें।

राज्य सरकार का लक्ष्य तकनीक आधारित पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित कर उत्तराखण्ड को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाना है।