Uttarakhand Discusses Financial Empowerment of Local Bodies | State Finance Commission Meeting
स्थानीय निकायों की वित्तीय मजबूती पर सरकार का मंथन, आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए मांगे गए ठोस सुझाव
देहरादून।
प्रदेश में नगर निकायों और जिला पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने गंभीर पहल शुरू कर दी है। इसी क्रम में मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में राज्य के छठे वित्त आयोग के अध्यक्ष एन. रविशंकर तथा आयोग के सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति, प्रशासनिक क्षमता और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत मंथन किया गया।
बैठक में नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत एवं जिला पंचायतों को प्रदेश की अर्थव्यवस्था में प्रभावी योगदानकर्ता बनाने के उपायों पर विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों ने माना कि वित्तीय आत्मनिर्भरता के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होने के बावजूद स्थानीय निकाय अपेक्षित स्तर तक आर्थिक रूप से सक्षम नहीं बन पाए हैं।
प्रमुख चुनौतियां आईं सामने
चर्चा के दौरान स्थानीय निकायों के सामने मौजूद कई संरचनात्मक एवं प्रशासनिक चुनौतियों को चिन्हित किया गया। इनमें प्रमुख रूप से—
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सीमित स्थानीय राजस्व स्रोत
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पारंपरिक एवं धीमी कार्यशैली
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स्पष्ट और प्रभावी बायलॉज का अभाव
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भूमि प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था
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अत्यधिक राजनीतिक हस्तक्षेप जैसी प्रवृत्तियां शामिल हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इन कारणों से राजस्व सृजन की संभावनाएं पूरी तरह उपयोग में नहीं आ पा रही हैं।
व्यावहारिक सुझावों पर जोर
मुख्य सचिव ने राज्य वित्त आयोग से अपेक्षा की कि स्थानीय शहरी निकायों और जिला पंचायतों की आय बढ़ाने तथा उन्हें वित्तीय रूप से सक्षम बनाने के लिए व्यवहारिक, समयबद्ध और क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार किए जाएं। उन्होंने स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, नई राजस्व संभावनाओं की पहचान और संस्थागत क्षमता विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा।
भूमि प्रबंधन और नवाचार होंगे अहम
राज्य वित्त आयोग ने बैठक में बताया कि शहरी निकायों की वित्तीय मजबूती के लिए—
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प्रभावी भूमि प्रबंधन प्रणाली
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राजस्व सृजन से जुड़े आधुनिक बायलॉज
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विशेषज्ञता आधारित कार्यसंस्कृति
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नवाचारों को अपनाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
इसके साथ ही आयोग ने सुझाव दिया कि वर्तमान में जिला योजना का आवंटन केवल एलोकेशन आधारित होने के बजाय आवश्यकता और परिणाम आधारित (Need & Outcome Based) बनाया जाना चाहिए, जिससे विकास योजनाओं का वास्तविक प्रभाव सामने आ सके।
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में आयोग के सदस्य पी. एस. जंगपांगी, एम. सी. जोशी, सचिव नितेश झा, दिलीप जावलकर, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार का मानना है कि स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना न केवल बेहतर शहरी एवं ग्रामीण शासन के लिए आवश्यक है, बल्कि इससे प्रदेश की समग्र आर्थिक विकास गति को भी मजबूती मिलेगी।





