Uttarakhand Mock Drill 2026 Success | Disaster Preparedness Tested Across 8 Districts

मॉक ड्रिल में दिखा बेहतर समन्वय, आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों का व्यापक परीक्षण सफल
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का दूसरा चरण बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह अभ्यास उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशन एवं निकट पर्यवेक्षण में आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के आठ जनपदों—हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, चमोली, चम्पावत, टिहरी, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा—में बहु-स्थलीय अभ्यास किए गए।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से मॉक ड्रिल के सभी चरणों की लगातार निगरानी की गई। इस दौरान बाढ़, भूस्खलन, भूकंप, औद्योगिक दुर्घटना, वनाग्नि, सड़क दुर्घटना, मानव-वन्यजीव संघर्ष और भगदड़ जैसे विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों पर आधारित अभ्यास कर विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और संसाधनों के प्रभावी उपयोग का परीक्षण किया गया।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि दोनों दिनों के अभ्यास सफल रहे और विभिन्न विभागों एवं एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला। उन्होंने कहा कि त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों की उपलब्धता और जमीनी स्तर पर कार्य करने की क्षमता संतोषजनक रही है। साथ ही, अभ्यास के दौरान सामने आई कमियों का विस्तृत विश्लेषण कर उन्हें शीघ्र दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में वास्तविक आपदा की स्थिति में और अधिक प्रभावी तरीके से कार्य किया जा सके।
जनपदवार प्रमुख अभ्यास
हरिद्वार: हरकी पैड़ी, शिवपुल, मनसा देवी मार्ग, लक्सर और रुड़की में बाढ़ एवं भगदड़ जैसे जटिल परिदृश्यों पर अभ्यास किया गया। गंगा के जलस्तर में वृद्धि, तटबंध टूटने और लोगों के बहने जैसी स्थितियों में त्वरित रेस्क्यू, भीड़ नियंत्रण और घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रभावी प्रदर्शन किया गया।
देहरादून: ऋषिकेश, विकासनगर, मसूरी और कालसी में बहु-जोखिम परिदृश्यों पर अभ्यास हुआ। विस्फोट, भूकंप के बाद आग, भूस्खलन और बस दुर्घटना जैसी घटनाओं पर पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग ने समन्वित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया।
ऊधमसिंह नगर: किच्छा, गदरपुर, खटीमा, काशीपुर और पंतनगर में बाढ़, औद्योगिक दुर्घटना और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर केंद्रित अभ्यास किए गए। औद्योगिक सुरक्षा, रेस्क्यू और चिकित्सा सहायता की तत्परता को परखा गया।
चमोली: भूकंप, भूस्खलन, सुरंग धंसाव, एवलांच और वनाग्नि जैसे परिदृश्यों पर अभ्यास कर फंसे लोगों के रेस्क्यू और राहत कार्यों की दक्षता का परीक्षण किया गया।
चम्पावत: रोड ब्लॉक, भूस्खलन, बाढ़, जलभराव, भूकंप और वनाग्नि जैसे बहु-आपदा परिदृश्यों पर व्यापक अभ्यास किया गया।
पिथौरागढ़: भूकंप, भूस्खलन, राष्ट्रीय राजमार्ग अवरोध, वनाग्नि और केमिकल गैस रिसाव जैसी घटनाओं पर आधारित अभ्यास में रेस्क्यू, चिकित्सा सहायता और मार्ग बहाली की प्रक्रिया को परखा गया।
अल्मोड़ा: रानीखेत, द्वाराहाट, सल्ट, भिकियासैंण और लमगड़ा में भूकंप, वनाग्नि और सड़क दुर्घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया गया। मलबे से लोगों को निकालने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया।





