Viksit Vibrant Village Programme 2026: भ्रमण से भ्रम मिटते हैं, सीमांत गांव हैं भारत के पहले गांव – पीएम मोदी

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PM Modi Interacts with 400 Youth Under Viksit Vibrant Village Programme 2026

‘भ्रमण से भ्रम मिटते हैं, सीमांत गांव देश के प्रहरी भी हैं और पहला पड़ाव भी’: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2026 के तहत सीमांत गांवों का अनुभव साझा करने जुटे 400 युवा, देहरादून के 6 प्रतिभागियों ने भी रखा उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व

देहरादून।
देश के सीमावर्ती गांवों को विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से संचालित ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2026’ के अंतर्गत रविवार को एक प्रेरणादायी संवाद आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 सीमावर्ती गांवों का भ्रमण कर लौटे 400 से अधिक युवाओं से संवाद किया और उनके अनुभवों को विस्तार से सुना।

यह कार्यक्रम ‘माइ भारत (MY Bharat)’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को सीमांत क्षेत्रों की भौगोलिक, सांस्कृतिक, सामरिक और सामाजिक विशेषताओं से परिचित कराना तथा उनमें राष्ट्र सेवा और राष्ट्रीय एकता की भावना को सशक्त बनाना है।

तीन लाख युवाओं में से चुने गए 403 प्रतिभागी

इस राष्ट्रीय पहल के लिए आयोजित ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में देशभर से 3 लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। विभिन्न चरणों के चयन के बाद 403 प्रतिभागियों को सीमावर्ती क्षेत्रों के अध्ययन भ्रमण के लिए चुना गया। उत्तराखंड से 15 युवाओं का चयन हुआ, जिनमें देहरादून जिले के छह युवा—शिवांग रमोला, नेहा रेवंकर, पलक पांथरी, आकांक्षा बिष्ट, संदीप नेगी और वरदान शामिल रहे। इन युवाओं ने सीमांत गांवों में रहकर वहां के जीवन, संस्कृति, विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के संघर्ष व समर्पण को करीब से समझा।

सीमांत गांव देश के अंतिम नहीं, पहले गांव हैं : प्रधानमंत्री

संवाद के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की सोच अब बदल रही है। सीमावर्ती गांवों को अब देश का अंतिम छोर नहीं, बल्कि “भारत का पहला गांव” माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर बसे ये गांव केवल भौगोलिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि ये देश की सुरक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता के सशक्त प्रहरी भी हैं।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा,

“भ्रमण से भ्रम मिटते हैं। जब हम किसी स्थान को स्वयं देखते और वहां के लोगों से मिलते हैं, तभी वास्तविक भारत को समझ पाते हैं। सीमांत गांवों की संस्कृति, परंपराएं, प्रकृति और वहां के लोगों का राष्ट्रप्रेम पूरे देश को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना से जोड़ता है।”

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने अनुभवों को परिवार, मित्रों, शैक्षणिक संस्थानों और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि सीमांत पर्यटन को नई गति मिले और इन क्षेत्रों के प्रति लोगों का दृष्टिकोण सकारात्मक बने।

30 दिनों की यात्रा बनी जीवन का अविस्मरणीय अनुभव

यह अध्ययन भ्रमण 3 जून से 30 जून 2026 तक दो चरणों में आयोजित किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों ने सीमांत गांवों में पहुंचकर वहां तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे और सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

युवाओं ने गांवों में निर्मित पक्की सड़कें, निर्बाध बिजली एवं पेयजल व्यवस्था, सोलर लाइट, इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं सहित विकास कार्यों को नजदीक से देखा। साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों के जीवन, पारंपरिक संस्कृति, लोककलाओं, रीति-रिवाजों और सीमाओं की रक्षा के प्रति उनके समर्पण को भी महसूस किया।

प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री को बताया कि सीमांत क्षेत्रों के लोगों का स्नेह, आतिथ्य और राष्ट्रभक्ति उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायी रही। उन्होंने कहा कि यह भ्रमण केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने और भारत की वास्तविक शक्ति को समझने का अवसर बना।

देहरादून के एनआईसी केंद्र में दिखा उत्साह

प्रधानमंत्री के साथ आयोजित इस वर्चुअल संवाद का सीधा प्रसारण राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), देहरादून में भी किया गया। कार्यक्रम में परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, राज्य निदेशक राहुल डबराल, उप निदेशक मोनिका नांदल, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय सहित माइ भारत संगठन से जुड़े अनेक युवा, अधिकारी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने प्रधानमंत्री की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम न केवल सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास को गति देगा, बल्कि युवाओं में राष्ट्रीय चेतना, सीमाओं के प्रति संवेदनशीलता और देश की सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत करेगा। यह कार्यक्रम विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।