वन्यजीव पर्यटन से बढ़ेगी स्थानीय अर्थव्यवस्था, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के निर्देश: सीएम धामी

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CM Dhami Pushes Wildlife Tourism, AI Monitoring & Human-Wildlife Conflict Mitigation in Uttarakhand

वन्यजीव आधारित पर्यटन से बढ़ेगी स्थानीय अर्थव्यवस्था, मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री धामी

राज्य वन्यजीव बोर्ड और राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक में लिए गए कई अहम निर्णय

मानव-वन्यजीव संघर्ष में साहस दिखाने वाले नागरिकों को मिलेगा राज्य स्तरीय सम्मान, हरिद्वार कुंभ के लिए विशेष QRT तैनात होगी

देहरादून, 25 जुलाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने, वन्यजीव संरक्षण को आधुनिक तकनीक से मजबूत बनाने तथा वन्यजीव आधारित पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने के लिए व्यापक और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संपदा राज्य की अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण और सतत उपयोग दोनों समान रूप से आवश्यक हैं।

शुक्रवार को सचिवालय स्थित विश्वकर्मा भवन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की 23वीं बैठक तथा राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम, वन्यजीव गलियारों के संरक्षण, विकास परियोजनाओं और बाघ संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए सभी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वीकृत विकास परियोजनाओं में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित सभी शर्तों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि पर्यावरणीय संतुलन और विकास दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकें।

वन्यजीव आधारित पर्यटन बनेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है। इसके लिए राज्य में वन्यजीव आधारित पर्यटन (Wildlife Tourism) को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा दिया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और पर्यटन आधारित आर्थिक अवसर प्राप्त हों।

उन्होंने कहा कि राज्य की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए ईको-टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन का विस्तार उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।

मानव-वन्यजीव संघर्ष में बहादुरी दिखाने वालों को मिलेगा सम्मान

मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के दौरान दूसरों की जान बचाने या साहसिक कार्य करने वाले आम नागरिकों को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाए। उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक संदेश देने और जनसहभागिता बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल बताया।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि वन्यजीवों के हमलों में मृतक एवं घायलों के परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुरूप समयबद्ध मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत मिल सके।

आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी, AI और ड्रोन का बढ़ेगा उपयोग

बैठक में बताया गया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए राज्य में त्वरित प्रतिक्रिया दल (Quick Response Team-QRT) सक्रिय किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कैमरा ट्रैप, ड्रोन, सर्प बचाव किट, सोलर लाइट और अन्य आधुनिक संसाधनों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन्यजीव कॉरिडोरों की सुरक्षा, कैमरा ट्रैप नेटवर्क, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली, वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन तथा संवेदनशील क्षेत्रों में तकनीक आधारित मॉनिटरिंग को और अधिक मजबूत बनाया जाए।

उन्होंने प्राकृतिक जल स्रोतों, चारागाहों के विकास और वनाग्नि प्रबंधन को भी वन्यजीव संरक्षण की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इन क्षेत्रों में विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।

हरिद्वार कुंभ के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने आगामी हरिद्वार कुंभ को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिए कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को रोकने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष QRT टीमों की तैनाती की जाए। साथ ही निगरानी व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीकों से सुदृढ़ किया जाए।

जनहित परियोजनाओं को सशर्त मंजूरी

बैठक में संरक्षित क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न विकास परियोजनाओं पर भी विचार किया गया। राजाजी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में गैस पाइपलाइन, अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में सड़क निर्माण, आईटीबीपी अवसंरचना तथा ऑप्टिकल फाइबर केबल जैसी जनहित परियोजनाओं को आवश्यक पर्यावरणीय एवं वन्यजीव संरक्षण संबंधी शर्तों के अधीन राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति को अग्रसारित करने की अनुमति प्रदान की गई।

टाइगर संरक्षण को और मिलेगा बल

राज्य स्तरीय बाघ संचालन समिति की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश के प्रमुख बाघ आवासों में से एक है। इसलिए बाघ संरक्षण में स्थानीय समुदायों की सहभागिता, आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बैठक में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व के लिए टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन, पर्यावरण अनुकूल सफारी वाहनों को बढ़ावा देने, संरक्षित क्षेत्रों में कार्यरत फील्ड स्टाफ को विशेष प्रोत्साहन तथा वन्यजीव अपराधों की प्रभावी जांच और नियंत्रण के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में रहे उपस्थित

बैठक में वन मंत्री सुबोध उनियाल, विधायक दीवान सिंह बिष्ट, उत्तराखंड जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष गीताराम गौड़, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) कपिल लाल, एडीजी ए.पी. अंशुमन, सचिव सी. रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक नीना ग्रेवाल तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।