Char Dham Yatra 2026: विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर उत्तराखण्ड, प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

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Uttarakhand Sees Record Pilgrim Growth Across Char Dham, Kainchi Dham & Major Temples in 2026

उत्तराखण्ड आध्यात्मिक पर्यटन में नई ऊंचाइयों पर: चारधाम के साथ प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

जागेश्वर और त्रियुगीनारायण में दर्शनार्थियों की संख्या ढाई गुना, धारी देवी में दोगुनी और पूर्णागिरि में डेढ़ गुना वृद्धि

देहरादून, 03 अगस्त 2026। उत्तराखण्ड तेजी से विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चारधाम यात्रा की अभूतपूर्व सफलता के साथ-साथ राज्य के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार द्वारा तीर्थस्थलों के समग्र विकास, आधुनिक सुविधाओं के विस्तार, सड़क एवं परिवहन नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

पर्यटन विभाग के वर्ष 2026 की पहली छमाही (जनवरी-जून) के आंकड़े बताते हैं कि चारधाम के अलावा जागेश्वर धाम, त्रियुगीनारायण, धारी देवी, पूर्णागिरि, कैंची धाम, कार्तिक स्वामी, सुरकंडा देवी तथा आदि कैलाश जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को भी मजबूती मिल रही है।

चारधाम यात्रा ने रचा नया इतिहास

इस वर्ष चारधाम यात्रा लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। यात्रा के 105 दिनों में 45,84,375 श्रद्धालु बाबा केदार, भगवान बदरीविशाल, माँ गंगा और माँ यमुना के दर्शन कर चुके हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या राज्य सरकार द्वारा किए गए बेहतर प्रबंधन, डिजिटल सुविधाओं, परिवहन व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर बढ़ते विश्वास को भी दर्शाती है।

जागेश्वर और त्रियुगीनारायण में ढाई गुना वृद्धि

अल्मोड़ा स्थित प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में वर्ष 2026 की पहली छमाही में 1,74,119 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि में यह संख्या 67,875 थी। यानी यहां लगभग ढाई गुना वृद्धि दर्ज की गई।

इसी प्रकार रुद्रप्रयाग जिले के पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर, जहां भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का साक्षी माना जाता है, वहां इस वर्ष 3,40,385 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 1,36,120 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे।

धारी देवी और पूर्णागिरि में भी बढ़ी आस्था

श्रीनगर के निकट स्थित धारी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या दोगुनी होकर 5,42,626 पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 2,83,275 थी।

चंपावत स्थित पूर्णागिरि धाम में भी आस्था का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है। इस वर्ष जून तक 20,91,788 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 14,35,290 श्रद्धालु पहुंचे थे। यानी लगभग डेढ़ गुना वृद्धि दर्ज की गई।

कैंची धाम बना सबसे बड़ा आकर्षण

नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या ने इस वर्ष सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। जनवरी से जून 2026 के बीच यहां 24,34,507 श्रद्धालु बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे। इनमें केवल जून माह में ही 8.66 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने धाम में दर्शन किए।

आदि कैलाश यात्रा में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश धाम में भी श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के केवल दो महीनों में ही 52,441 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। मानसून के कारण फिलहाल 1 जुलाई से यात्रा स्थगित है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2023 के दौरे के बाद आदि कैलाश यात्रा को नई पहचान मिली है। जहां वर्ष 2022 से पहले यहां प्रतिवर्ष दो हजार से भी कम श्रद्धालु पहुंचते थे, वहीं वर्ष 2023 में 10,025, वर्ष 2024 में 29,352, वर्ष 2025 में 36,526 और वर्ष 2026 में मात्र दो महीनों के भीतर ही 52,441 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

यमुनोत्री ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड

कठिन पर्वतीय मार्ग होने के बावजूद यमुनोत्री धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया इतिहास रच दिया है। 2 अगस्त 2026 तक 6,54,958 श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक संख्या है।

पिछले वर्षों की तुलना में आंकड़े इस प्रकार हैं—

  • 2026: 6,54,958
  • 2025: 6,44,637
  • 2024: 5,15,067
  • 2023: 5,60,918
  • 2022: 6,21,504
  • 2021: 33,331

बद्रीनाथ धाम भी बनाएगा नया कीर्तिमान

31 जुलाई 2026 को बद्रीनाथ यात्रा के 100 दिन पूरे होने तक 15,52,021 श्रद्धालु भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर चुके थे। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 12,40,408 थी। यानी इस वर्ष 3,11,613 अधिक श्रद्धालु बद्रीनाथ पहुंचे हैं। मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इस वर्ष बद्रीनाथ यात्रा नए रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है।

मुनिकीरेती-तपोवन और शिवपुरी भी आकर्षण का केंद्र

आध्यात्मिक पर्यटन के साथ एडवेंचर और योग पर्यटन का संगम बने टिहरी जिले के मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र में भी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जनवरी से जून 2026 के दौरान यहां 15,97,439 पर्यटक पहुंचे, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 13,62,600 थी।

इसी तरह कार्तिक स्वामी मंदिर (रुद्रप्रयाग) और सुरकंडा देवी मंदिर (टिहरी) में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

आध्यात्मिक राजधानी के विजन पर तेजी से काम

राज्य सरकार उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। इसके तहत प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने, मानसखंड मंदिरमाला मिशन के माध्यम से कुमाऊं के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं विकास, तीर्थस्थलों पर आधुनिक सुविधाओं के निर्माण, सड़क संपर्क बेहतर बनाने तथा परिवहन सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि इसके माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार, होमस्टे, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई पहचान दिलाना है।

मुख्यमंत्री का वक्तव्य

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य के प्रमुख और प्राचीन मंदिरों का संरक्षण एवं विकास किया जा रहा है। तीर्थस्थलों पर सड़क, पेयजल, पार्किंग, आवास, स्वच्छता, डिजिटल सुविधाओं तथा अन्य आधारभूत ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और दिव्य यात्रा का अनुभव मिल सके।