One Nation One Election: Shivraj Singh Chouhan, CM Dhami in Haridwar
हरिद्वार संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर संवाद, शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री धामी ने जताया समर्थन
बार-बार चुनाव विकास की गति में बाधक, देशहित में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ आवश्यक: शिवराज सिंह चौहान
‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा विषय: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
संत समाज से जनजागरण में सहयोग की अपील, विकसित भारत के लिए निरंतर विकास गति पर जोर
हरिद्वार। प्राचीन अवधूत मंडल आश्रम में आयोजित संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संत समाज को संबोधित करते हुए देश में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की आवश्यकता पर विस्तार से विचार रखे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
बार-बार चुनाव विकास की गति में बाधक: शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के माध्यम से देश में चुनावी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों के कारण देश के संसाधनों, समय और प्रशासनिक क्षमता का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में लग जाता है, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव विकास कार्यों और जनसेवा पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू होने से अनेक विकास कार्य प्रभावित होते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिस और सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या चुनावी दायित्वों में लगती है। इससे शासन-प्रशासन का महत्वपूर्ण समय विकास और जनकल्याण के कार्यों के बजाय चुनावी व्यवस्थाओं में व्यतीत होता है।
चौहान ने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ आयोजित किए जाएं तो चुनावी प्रक्रिया में लगने वाले समय और संसाधनों में कमी लाई जा सकती है। इससे प्रशासन को विकास कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा और सार्वजनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
संत समाज से जनजागरण में सहयोग का आह्वान
केंद्रीय मंत्री ने संत समाज से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विषय पर जनजागरण में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं का समाज पर व्यापक प्रभाव है और उनके माध्यम से राष्ट्रीय विषयों पर सकारात्मक जनसंवाद को गति मिल सकती है।
उन्होंने संत समाज से आग्रह किया कि वे अपने प्रवचनों और सामाजिक संवाद के माध्यम से जनता को ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की आवश्यकता और संभावित लाभों के बारे में जागरूक करें। चौहान ने कहा कि यह विषय किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सुशासन और विकास से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।
उन्होंने कहा, “देश पहले है, पार्टी बाद में।” देश मजबूत और आगे बढ़ेगा तो लोकतंत्र और राजनीतिक व्यवस्था भी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को व्यापक जनसमर्थन मिलना आवश्यक है।
वंदे मातरम को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में ‘वंदे मातरम’ के महत्व पर भी चर्चा की। उन्होंने इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताते हुए इसके पूर्ण स्वरूप के सम्मान और समर्थन की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा देश को किसी भी प्रकार के विभाजन से बचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संत समाज से राष्ट्र की एकता, अखंडता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राष्ट्रहित और सुशासन का विषय: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण पर्व हैं। हालांकि, लगातार चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का प्रभाव शासन और विकास कार्यों पर भी पड़ता है। बार-बार चुनाव होने के कारण प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिस और सुरक्षा बलों को चुनावी जिम्मेदारियों में लगाया जाता है तथा आचार संहिता के कारण कई विकास योजनाओं की गति प्रभावित होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन और संसाधनों की बचत होती है तथा प्रशासन को जनसेवा और विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
विकसित भारत के लिए विकास की निरंतर गति जरूरी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को राष्ट्रीय विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बनाते हुए इस दिशा में पहल की है। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए देश में विकास की निरंतर गति बनाए रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे समय में शासन का अधिकतम समय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और जनकल्याण से जुड़े कार्यों पर केंद्रित होना चाहिए। चुनावी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित करने से प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
संत समाज से मार्गदर्शन की अपील
मुख्यमंत्री ने पूज्य संत-महात्माओं से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने सदैव राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र का संकल्प होना चाहिए कि लोकतंत्र मजबूत हो, विकास निरंतर हो, संस्कृति सुरक्षित रहे और राष्ट्र सर्वोपरि हो। उन्होंने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ जैसे विषयों पर व्यापक और सकारात्मक जनसंवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम में संत समाज और उपस्थित जनसमुदाय ने राष्ट्रहित, लोकतांत्रिक मूल्यों, सुशासन और विकास की निरंतरता से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया।





