CM Pushkar Singh Dhami visited a jewellery exhibition in Dehradun and emphasised taking Uttarakhand’s traditional jewellery from ‘Local to Global’ while promoting artisan skill development.
मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून में सर्राफ मंडल की भव्य एग्जीबिशन का किया अवलोकन, पारंपरिक आभूषणों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाने पर जोर
देहरादून, 6 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को राजपुर रोड, देहरादून स्थित एक होटल में सर्राफ मंडल देहरादून की ओर से आयोजित भव्य आभूषण प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनी में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों पर पारंपरिक एवं आधुनिक आभूषणों के डिजाइनों, स्वर्णकारों की कला और कारीगरी को देखा तथा आयोजन के लिए सर्राफ मंडल और स्वर्णकार समाज को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के आयोजन भारतीय कला, संस्कृति, परंपरा और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने के साथ-साथ कारीगरों को बाजार और नए अवसर उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि स्वर्णकार समाज केवल आभूषणों का निर्माण करने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सदियों पुरानी कारीगरी को संरक्षित कर उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में आभूषणों का विशेष सांस्कृतिक महत्व रहा है। विवाह, त्योहार, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य शुभ अवसरों पर पहने जाने वाले पारंपरिक आभूषण हमारी परंपराओं, भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।
‘वोकल फॉर लोकल’ से स्थानीय हुनर को मिल रहे नए अवसर
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’, ‘मेड इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से देश के स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और स्वदेशी हुनर को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल रही है।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत को वैश्विक स्तर पर ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइनिंग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रदर्शनियां कारीगरों और व्यवसायियों को अपने उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का मंच प्रदान कर सकती हैं।
उत्तराखंड के पारंपरिक आभूषणों को मिले वैश्विक बाजार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति में पारंपरिक आभूषणों का विशेष स्थान है। गढ़वाली नथ, पौंजी, चंपकली हार, कुमाऊंनी गुलोबंद, पिचौरा हार और झूमका जैसे पारंपरिक आभूषण राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि इन पारंपरिक डिजाइनों को संरक्षित करने के साथ ही उन्हें आधुनिक जरूरतों और बदलती पसंद के अनुरूप विकसित किए जाने की आवश्यकता है। इससे उत्तराखंड के पारंपरिक आभूषणों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने के साथ ‘लोकल टू ग्लोबल’ के लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है।
स्वर्णकारों के कौशल विकास और आर्थिक सशक्तीकरण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कौशल विकास, आर्थिक सहायता और बाजार से बेहतर जुड़ाव के माध्यम से स्वर्णकारों एवं कारीगरों को सशक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक आभूषणों के संरक्षण के साथ-साथ स्वर्णकार समाज के कौशल विकास और नई तकनीकों से जुड़ाव पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है। इससे युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी अधिक मजबूती से जुड़ सकेगी।
‘सर्वश्रेष्ठ राज्य’ बनाने के संकल्प में सहयोग का आह्वान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का ‘सर्वश्रेष्ठ राज्य’ बनाने के लिए ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ काम कर रही है। उन्होंने स्वर्णकार समाज और स्थानीय कारीगरों से इस संकल्प को साकार करने में सक्रिय सहयोग और सहभागिता का आह्वान किया।
इस अवसर पर सर्राफ मंडल देहरादून के पदाधिकारी एवं सदस्य, स्वर्णकार समाज के प्रतिनिधि, आभूषण व्यवसायी, कारीगर तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।






