Uttarakhand Earthquake Alert: हर माह 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा सायरन

0
14

Uttarakhand Earthquake Siren Test Every Month at 11 AM

उत्तराखंड में हर महीने 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा भूकम्प चेतावनी सायरन

 

Uttarakhand will test earthquake warning sirens at 11 AM on the 9th of every month. Learn about the Bhudev app alerts, 169 sensors and 112 sirens.

 

भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की नियमित जांच और जनजागरूकता के लिए पहल; मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने दिए निर्देश

 

राज्य में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित, परीक्षण के दौरान भूदेव ऐप पर भी मिलेगा अलर्ट संदेश

 

देहरादून। उत्तराखंड में भूकम्प के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल की है। अब प्रदेश में प्रत्येक माह की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे भूकम्प चेतावनी सायरन बजाया जाएगा। यह सायरन किसी वास्तविक भूकम्प की सूचना नहीं होगा, बल्कि पूर्व चेतावनी प्रणाली में स्थापित सेंसर और सायरनों की नियमित जांच तथा आमजन को चेतावनी संकेतों से परिचित कराने के उद्देश्य से बजाया जाएगा।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने बुधवार देर शाम सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के साथ बैठक कर इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति पर चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड भूकम्पीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। प्रदेश का बड़ा भू-भाग भूकम्पीय जोन चार और पांच में आता है। ऐसे में जनजागरूकता, पूर्व तैयारी और समय पर चेतावनी प्राप्त करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत स्थापित सेंसर और सायरनों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि वास्तविक आपदा के समय प्रणाली प्रभावी ढंग से कार्य कर सके।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आवश्यकता के अनुसार राज्य में अतिरिक्त सेंसर और सायरन स्थापित किए जाएं। नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान कर उन्हें दूर किया जा सकेगा और आपात स्थिति में चेतावनी प्रसारित करने की क्षमता बेहतर बनाई जा सकेगी।

हर महीने होगी सायरन और चेतावनी प्रणाली की जांच

प्रत्येक माह की 9 तारीख को सुबह 11 बजे होने वाला सायरन परीक्षण राज्य में स्थापित चेतावनी प्रणाली की कार्यक्षमता की जांच के लिए किया जाएगा। इस दौरान सायरनों के संचालन की स्थिति का परीक्षण किया जाएगा। यदि किसी स्थान पर तकनीकी समस्या सामने आती है, तो उसे तत्काल ठीक कराने की कार्रवाई की जाएगी।

इस पहल से न केवल उपकरणों की नियमित निगरानी सुनिश्चित होगी, बल्कि आमजन को भी यह समझने में मदद मिलेगी कि भूकम्प की स्थिति में चेतावनी मिलने पर किस प्रकार का सायरन बज सकता है। इससे वास्तविक आपदा के समय चेतावनी संकेतों को पहचानने और आवश्यक सावधानी बरतने में सहायता मिलेगी।

उत्तराखंड में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के अनुसार, वर्तमान में उत्तराखंड में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के अंतर्गत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। सेंसर के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है और निर्धारित प्रणाली के जरिए चेतावनी प्रसारित की जाती है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की के सहयोग से संचालित परियोजना के तहत अतिरिक्त सेंसर स्थापित करने का प्रस्ताव भी प्रक्रियाधीन है। इससे भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी और चेतावनी प्रणाली की क्षमता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

6 अक्टूबर के भूकम्प में सक्रिय रही पूर्व चेतावनी प्रणाली

सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 6 अक्टूबर 2026 को रात 10:23 बजे चमोली जिले में थराली के निकट भूकम्प आया था। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.9 और केंद्र की गहराई लगभग 13 किलोमीटर बताई गई। उनके अनुसार, इस घटना के दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से भूकंपीय तरंगों के आमजन तक पहुंचने से पहले चेतावनी प्राप्त हुई।

भूदेव मोबाइल ऐप और स्थापित सायरनों के माध्यम से लोगों को चेतावनी संकेत मिले। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रणाली की उपयोगिता को दर्शाती है। भूकम्प जैसी अचानक आने वाली आपदा में कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर जाने, गैस और विद्युत उपकरणों को बंद करने तथा अन्य जरूरी सावधानियां बरतने का अवसर दे सकती है।

भूकम्प के सायरन की आवाज से परिचित होंगे लोग

सचिव ने बताया कि नियमित सायरन परीक्षण का एक प्रमुख उद्देश्य लोगों को चेतावनी संकेतों से परिचित कराना है। आमतौर पर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि भूकम्प की चेतावनी जारी होने पर किस प्रकार का सायरन सुनाई दे सकता है। हर महीने निर्धारित समय पर सायरन बजने से लोग इसकी ध्वनि पहचान सकेंगे और वास्तविक आपदा के समय चेतावनी को समझने में उन्हें आसानी होगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य लोगों में भय पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, सतर्क और आपदा के लिए तैयार करना है।

भूदेव ऐप पर भी मिलेगा परीक्षण संदेश

प्रत्येक माह की 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन बजने के साथ भूदेव मोबाइल ऐप के उपयोगकर्ताओं को भी परीक्षण संबंधी चेतावनी संदेश भेजा जाएगा। मोबाइल फोन पर वाइब्रेशन और बीप-बीप की ध्वनि के माध्यम से अलर्ट संकेत प्राप्त होगा।

आपदा प्रबंधन विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे अपने मोबाइल फोन में भूदेव ऐप का नवीनतम संस्करण इंस्टॉल या अपडेट रखें तथा ऐप को लोकेशन की अनुमति दें, ताकि संबंधित क्षेत्र के लिए जारी चेतावनी समय पर मोबाइल तक पहुंच सके।

यूएसडीएमए की आमजन से अपील

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) ने लोगों से अपील की है कि प्रत्येक माह की 9 तारीख को सुबह 11 बजे सायरन बजने पर घबराएं नहीं। यह पूर्व चेतावनी प्रणाली का निर्धारित परीक्षण होगा, न कि वास्तविक भूकम्प की घोषणा।

प्राधिकरण ने नागरिकों से निम्नलिखित सावधानियां बरतने का अनुरोध किया है:

  • अपने मोबाइल फोन में भूदेव और सचेत ऐप का नवीनतम संस्करण इंस्टॉल या अपडेट रखें।
  • दोनों ऐप को आवश्यक लोकेशन अनुमति प्रदान करें, ताकि चेतावनी संदेश प्राप्त हो सकें।
  • सायरन की आवाज को ध्यान से पहचानें, जिससे वास्तविक आपदा के समय चेतावनी संकेत समझने में आसानी हो।
  • निर्धारित समय पर होने वाले परीक्षण के दौरान घबराएं नहीं और इसे प्रणाली की नियमित जांच के रूप में समझें।
  • परिवार के सदस्यों, बच्चों, बुजुर्गों और आसपास के लोगों को भी इस पहल की जानकारी दें।
  • भूकम्प के दौरान सुरक्षित व्यवहार और आपदा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करें तथा आवश्यकता पड़ने पर मॉक ड्रिल में भाग लें।

इस पहल के माध्यम से उत्तराखंड में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की नियमित जांच के साथ-साथ आमजन की तैयारी और आपदा के प्रति जागरूकता को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।