Dehradun DM Acts on Animal Helpline 1962 Lapses
पशु हेल्पलाइन 1962 पर लापरवाही से नाराज डीएम, संबंधित कार्मिकों का वेतन रोकने के निर्देश
Dehradun DM Ashish Chauhan orders accountability over poor response on animal helpline 1962 and directs an animal monitoring portal, dairy surveys and improved stray animal management.
निराश्रित एवं पालतू पशुओं की निगरानी के लिए बनेगा समर्पित पोर्टल, डेयरियों का होगा विस्तृत सर्वेक्षण
गौशालाओं की नियमित निगरानी, पशु एम्बुलेंस की उपलब्धता और आवारा श्वानों के प्रभावी प्रबंधन पर डीएम का जोर
देहरादून, 28 अक्टूबर 2026। जनपद में निराश्रित एवं पालतू पशुओं के बेहतर प्रबंधन, पशु कल्याण और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने संबंधित विभागों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को ऋषिपर्णा सभागार में नगर निगम, नगर निकायों, पशुपालन विभाग और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में उन्होंने पशु पंजीकरण, डेयरी सर्वेक्षण, गौशालाओं की निगरानी, पशु चिकित्सा सेवाओं तथा हेल्पलाइन व्यवस्था की समीक्षा की।
बैठक के दौरान पशु हेल्पलाइन नंबर 1962 पर शिकायतों का उचित रिस्पॉन्स नहीं मिलने और पशु एम्बुलेंस उपलब्ध न होने संबंधी शिकायतों पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित व्यवस्थाओं में सुधार के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
पशु पंजीकरण एवं निगरानी के लिए विकसित होगा समर्पित पोर्टल
जिलाधिकारी ने नगर निगम देहरादून, नगर निगम ऋषिकेश और अन्य संबंधित नगर निकायों को निराश्रित एवं पालतू पशुओं के पंजीकरण और प्रभावी निगरानी के लिए समर्पित पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। पोर्टल पर पशुओं की संख्या, पंजीकरण की स्थिति और उनसे संबंधित आवश्यक जानकारियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पशुओं से संबंधित आंकड़ों का अद्यतन डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही नगर निगम एवं सभी नगर निकाय क्षेत्रों में संचालित डेयरियों का विस्तृत सर्वेक्षण कराने को कहा गया। सर्वेक्षण के दौरान डेयरियों की संख्या, उनमें रखे गए पशुओं की कुल संख्या और पंजीकृत पशुओं का विवरण संकलित किया जाएगा।
हेल्पलाइन 1962 पर रिस्पॉन्स नहीं मिलने पर जताई नाराजगी
पशु हेल्पलाइन 1962 की कार्यप्रणाली की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्वयं हेल्पलाइन पर कॉल किया। अपेक्षित रिस्पॉन्स नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को संबंधित कार्मिकों की जवाबदेही निर्धारित करने और उनका वेतन रोकने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पशुओं के उपचार, रेस्क्यू और अन्य सहायता से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के साथ ही पशु एम्बुलेंस की उपलब्धता और संचालन की नियमित निगरानी की जाए, ताकि जरूरतमंद पशुओं को समय पर उपचार और सहायता मिल सके।
प्रमुख मार्गों पर कैमरों से होगी पशुओं के आवागमन की निगरानी
जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं नगर निकाय क्षेत्रों के प्रमुख प्रवेश और निकासी मार्गों पर कैमरे स्थापित करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य पशुओं के आवागमन पर नजर रखना और उनके प्रभावी प्रबंधन में सहायता प्राप्त करना है।
उन्होंने निराश्रित गौवंशीय पशुओं को पकड़ने, उनके सुरक्षित स्थानांतरण और समुचित देखभाल के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा। साथ ही, जनपद में संचालित गौशालाओं में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा-पानी, साफ-सफाई, उचित रखरखाव और चिकित्सकीय उपचार की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
गौशालाओं की नियमित निगरानी कर वहां उपलब्ध सुविधाओं और पशुओं की स्थिति का आकलन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को प्रभावी मॉनिटरिंग करने तथा गौशाला प्रबंधकों को आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
श्वानों के पंजीकरण और शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर जोर
शहर में पालतू एवं निराश्रित श्वानों के प्रबंधन को लेकर जिलाधिकारी ने पंजीकरण व्यवस्था प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने श्वान के काटने से संबंधित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए रैपिड रेस्क्यू टीम के माध्यम से आवश्यक कदम उठाने को कहा।
उन्होंने निर्देशित किया कि संबंधित श्वानों को नियमानुसार एबीसी सेंटर में 10 दिवसीय निगरानी एवं आइसोलेशन में रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। श्वानों से जुड़ी शिकायतों पर संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्रवाई करने के साथ ही आमजन की सुरक्षा तथा पशु कल्याण के निर्धारित मानकों का पालन किया जाए।
बंदरों के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग के साथ समन्वय
जिलाधिकारी ने बंदरों के आतंक से प्रभावित आबादी वाले क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप बंदरों का रेस्क्यू किया जाए। इससे नागरिकों को राहत देने के साथ वन्यजीव संरक्षण संबंधी प्रावधानों का पालन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों को पशु प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं में बेहतर समन्वय, नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पशु कल्याण, जनसुरक्षा और नागरिकों की शिकायतों के प्रभावी समाधान के लिए सभी विभागों को सक्रियता से कार्य करना होगा।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में वरिष्ठ पशुपालन अधिकारी एवं नगर निगम के डॉ. वी.के. अग्रवाल, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डी.के. चंद, नगर निगम देहरादून के डॉ. रोहित गहलोत सहित नगर निगम देहरादून, नगर निगम ऋषिकेश और अन्य नगर निकायों के संबंधित अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।




