उत्तराखंड में दो दिन का ऑरेंज अलर्ट: आपदा प्रबंधन सचिव ने की समीक्षा

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उत्तराखंड में दो दिन का ऑरेंज अलर्ट: आपदा प्रबंधन सचिव ने की समीक्षा, जिलों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

देहरादून:

प्रदेश में लगातार बदलते मौसम के बीच उत्तराखंड में सोमवार और मंगलवार के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। रविवार को कई जिलों में आए आंधी-तूफान और भारी बारिश के बाद आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तैयारियों की समीक्षा की।

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने सभी जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर हालात का विस्तृत आकलन किया और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी दो दिनों तक मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहे और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे।

सचिव ने निर्देश दिए कि मौसम विभाग द्वारा जारी सभी अलर्ट और सूचनाएं राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) के माध्यम से तत्काल आम जनता तक पहुंचाई जाएं, ताकि लोग समय रहते सावधानी बरत सकें।

मौसम विभाग के अनुसार, 4 मई को देहरादून, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चम्पावत जिलों में तथा 5 मई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में ऑरेंज अलर्ट लागू रहेगा। इस दौरान तेज बारिश, ओलावृष्टि, आकाशीय बिजली और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बारिश और भूस्खलन के कारण बाधित सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द खोला जाए। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना मिली थी, जिनमें से अधिकांश को बहाल कर दिया गया है और शेष को शीघ्र चालू करने के प्रयास जारी हैं।

चारधाम यात्रा को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए गए हैं। हेलीकॉप्टर सेवाओं के संचालन को पूरी तरह मौसम पर निर्भर रखने और प्रतिकूल परिस्थितियों में उड़ानों को स्थगित करने को कहा गया है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

सचिव ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें, अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, जिससे संभावित जोखिम को कम किया जा सके।