जूडिशियम 2.0 सम्मेलन में बोले मुख्यमंत्री धामी, न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी और सुलभ बनाना प्राथमिकता

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Judicium 2.0 Conference: CM Dhami Advocates Inclusive Justice System, Announces ₹5 Crore for Judges Association

न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ एवं सुदृढ़ बनाने में “जूडिशियम 2.0” महत्वपूर्ण पहल : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को यू.पी.ई.एस., बिधौली में आयोजित उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्षिक सम्मेलन “जूडिशियम 2.0 : इंक्लूज़न, एक्सेस एंड स्ट्रेंथनिंग” में प्रतिभाग करते हुए न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराना सुशासन की मूल भावना है तथा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्मेलन की थीम—समावेशिता, न्याय तक सरल पहुंच और न्यायिक संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण—विकसित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय संकल्प से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था में समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर एवं सम्मान मिलना चाहिए तथा न्याय प्राप्त करने में भौगोलिक दूरी अथवा आर्थिक परिस्थितियां किसी भी प्रकार की बाधा नहीं बननी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न्याय सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। न्याय की वास्तविक सार्थकता उसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता में निहित है। यदि न्याय में अनावश्यक विलंब होता है तो आमजन का विश्वास प्रभावित होता है। इसलिए न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, आधुनिक और समयबद्ध बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक सशक्त स्तंभ है, जो न केवल नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है बल्कि समाज में सुरक्षा, विश्वास और विधि के शासन को भी मजबूत बनाती है। उन्होंने कहा कि कानून के शासन की सफलता न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास पर निर्भर करती है और न्यायाधीश इस महत्वपूर्ण दायित्व का उत्कृष्ट निर्वहन कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किए गए सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानूनों के लागू होने से न्यायिक प्रणाली में व्यापक सुधार हुए हैं। इसके अतिरिक्त ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित सुनवाई जैसी व्यवस्थाओं ने न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार भी न्यायिक आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और तकनीक आधारित न्यायिक सेवाओं को विस्तार दिया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को न्याय प्राप्त करने में सुविधा मिल सके। उन्होंने बताया कि राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से वर्षों से लंबित मामलों का त्वरित, सरल एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

कानून व्यवस्था के विषय में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपराध और भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्य कर रही है। उन्होंने नकल विरोधी कानून, अवैध धर्मांतरण निरोधक कानून, दंगा रोधी कानून तथा भ्रष्टाचार और अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कदमों से उत्तराखंड में कानून के शासन को और अधिक मजबूती मिली है तथा जनता का विश्वास बढ़ा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और सभी नागरिकों को समान अधिकार एवं न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) एक ऐतिहासिक पहल है, जिसकी देशभर में चर्चा हो रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “जूडिशियम 2.0” सम्मेलन न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ, पारदर्शी और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा विकसित और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड जज एसोसिएशन की कल्याण निधि के लिए 5 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया।

कार्यक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता सहित विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश, विधि विशेषज्ञ और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।