मानसून से पहले उत्तराखंड में सबसे बड़ी आपदा मॉक ड्रिल, 66 स्थानों पर होगा अभ्यास

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उत्तराखंड मेगा मॉक ड्रिल 2026: 02 जुलाई को 13 जिलों में आपदा अभ्यास, CM धामी करेंगे निरीक्षण

02 जुलाई को उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में होगी राज्यव्यापी मेगा मॉक ड्रिल

66 संवेदनशील स्थानों पर होगा आपदा प्रबंधन का लाइव अभ्यास, यूएसडीएमए में टेबल टॉप एक्सरसाइज के जरिए परखी गई तैयारियां

देहरादून। मानसून सीजन के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए उत्तराखंड सरकार 02 जुलाई को राज्य के सभी 13 जनपदों में अब तक की सबसे व्यापक राज्य स्तरीय आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल आयोजित करेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आयोजित इस मेगा अभ्यास के दौरान प्रदेश के 66 चिन्हित संवेदनशील स्थलों पर राहत एवं बचाव कार्यों का वास्तविक परिस्थितियों जैसा अभ्यास किया जाएगा। मुख्यमंत्री स्वयं भी मॉक ड्रिल का निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लेंगे।

मॉक ड्रिल से पहले अंतिम चरण की तैयारियों का आकलन करने के लिए मंगलवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) में टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इस अभ्यास के माध्यम से राज्य के सभी 13 जिलों, विभिन्न रेखीय विभागों, आपदा प्रतिक्रिया बलों और संबंधित एजेंसियों की समन्वित कार्यप्रणाली, संसाधनों की उपलब्धता तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।

95 प्रतिशत नए स्थानों पर होगा अभ्यास

यूएसडीएमए के अनुसार इस बार मॉक ड्रिल को पहले से अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया गया है। कुल 66 स्थानों में से लगभग 95 प्रतिशत स्थान नए चयनित किए गए हैं, ताकि विभिन्न प्रकार की भौगोलिक एवं आपदा संबंधी परिस्थितियों में विभागों की वास्तविक तैयारी का परीक्षण किया जा सके।

मॉक ड्रिल के दौरान अतिवृष्टि, भूस्खलन, बाढ़, जलभराव, मानव-वन्यजीव संघर्ष, सड़क अवरोध, नदी दुर्घटना और अन्य संभावित आपदाओं के परिदृश्यों पर राहत एवं बचाव अभियान संचालित किए जाएंगे।

पूर्व तैयारी ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की आधारशिला : विनोद कुमार सुमन

सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल औपचारिक अभ्यास नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना तथा वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी राहत एवं बचाव कार्यों की क्षमता विकसित करना है।

उन्होंने कहा कि प्रभावी आपदा प्रबंधन की सबसे मजबूत नींव पूर्व तैयारी है। यदि सभी विभाग समय रहते अपनी व्यवस्थाओं, उपकरणों और कार्यप्रणाली का परीक्षण कर आवश्यक सुधार कर लें तो किसी भी आपदा के दौरान जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि इस अभ्यास के माध्यम से संभावित कमियों, चुनौतियों और संचालन संबंधी बाधाओं की पहचान कर उनका समय रहते समाधान किया जाएगा, जिससे भविष्य में राहत एवं बचाव कार्य अधिक तेज, समन्वित और प्रभावी बन सकें।

टेबल टॉप एक्सरसाइज में परखी गई विभागों की प्रतिक्रिया क्षमता

टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से विभिन्न विभागों से काल्पनिक आपदा परिस्थितियों में उनके द्वारा उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी ली गई।

अधिकारियों से पूछा गया कि यदि अतिवृष्टि, बाढ़, भूस्खलन, जलभराव अथवा मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी घटनाओं की सूचना प्राप्त होती है तो किस प्रकार राहत एवं बचाव अभियान संचालित किए जाएंगे, कौन-कौन से संसाधनों का उपयोग होगा तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय कैसे स्थापित किया जाएगा।

इस दौरान गोताखोरों, जल पुलिस, जेसीबी मशीनों, नाव, राफ्ट, राहत शिविरों, चिकित्सा सहायता, संचार व्यवस्था तथा प्रभावित लोगों के पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

यूएसडीएमए के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी ने सभी जिलों को मॉक ड्रिल के संचालन, रिपोर्टिंग, समन्वय तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए।

30 जून को उत्तराखंड में पहुंचा मानसून

टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. रोहित थपलियाल ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून 30 जून को उत्तराखंड पहुंच चुका है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है। जून माह में उत्तराखंड में कुल 83 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 132 मिलीमीटर है।

आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान

कार्यक्रम के दौरान एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा अग्निशमन विभाग द्वारा आधुनिक आपदा राहत एवं बचाव उपकरणों की विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई।

अधिकारियों एवं प्रतिभागियों ने उपकरणों के संचालन, उपयोगिता तथा आपदा के दौरान उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

प्रदर्शनी में विशेष रूप से एनडीआरएफ द्वारा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल एवं परमाणु (CBRNE) आपदाओं में उपयोग किए जाने वाले अत्याधुनिक उपकरण आकर्षण का केंद्र रहे।

इसके अतिरिक्त प्रदर्शित प्रमुख उपकरणों में—

  • डीप डाइविंग सेट
  • नाइट विजन कैमरा
  • थर्मल इमेजिंग कैमरा
  • हाइड्रोलिक कटर
  • अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम
  • अंडरवाटर ड्रोन
  • सोनार सिस्टम
  • अन्य अत्याधुनिक खोज एवं बचाव उपकरण शामिल रहे।

इन सभी उपकरणों का अवलोकन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 02 जुलाई को आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान भी करेंगे।

एसडीआरएफ ने हासिल किया 100 प्रतिशत ‘सचेत’ और ‘भूदेव’ ऐप डाउनलोड लक्ष्य

यूएसडीएमए द्वारा संचालित ‘सचेत’ एवं ‘भूदेव’ मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड अभियान के तहत एसडीआरएफ के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने दोनों ऐप अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर लिए हैं। विभाग ने शत-प्रतिशत डाउनलोड का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

एसडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट शुभांक रतूड़ी ने टेबल टॉप एक्सरसाइज के दौरान इसकी जानकारी दी।

इस उपलब्धि पर सचिव विनोद कुमार सुमन ने एसडीआरएफ की सराहना करते हुए कहा कि तकनीक आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली आपदा प्रबंधन का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बताया कि यूएसडीएमए राज्यभर में सभी विभागों एवं कर्मचारियों के बीच ‘सचेत’ और ‘भूदेव’ ऐप डाउनलोड अभियान लगातार चला रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग समय पर मौसम और आपदा संबंधी अलर्ट प्राप्त कर सकें।

वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में आईजी अग्निशमन विम्मी सचदेवा, डीआईजी राजकुमार नेगी, निदेशक पशुपालन डॉ. उदय शंकर, एनडीआरएफ कमांडेंट संतोष कुमार, एसएसबी डीआईजी दुर्गा बहादुर, राजीव बलूनी, कर्नल पंकज अवस्थी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो. ओबैदुल्लाह अंसारी, उप निदेशक अग्निशमन एस.के. राणा, डॉ. अनीता चमोला, डॉ. रोहित थपलियाल, डॉ. पंकज सिंह, ग्रुप कैप्टन आर.आर. रौंथाण सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।