मुख्यमंत्री धामी ने हर्रावाला से सोमनाथ विशेष रेल को दिखाई हरी झंडी, 700 श्रद्धालु हुए रवाना

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CM Dhami Flags Off Special Somnath Pilgrimage Train | 700 Devotees Depart from Harrawala

 

‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर हर्रावाला से वेरावल के लिए विशेष आस्था रेल रवाना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिखाई हरी झंडी, 700 श्रद्धालु छह दिवसीय तीर्थ यात्रा पर रवाना

देहरादून, 13 जुलाई।
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के उपलक्ष्य में सोमवार को उत्तराखंड से गुजरात स्थित पवित्र सोमनाथ धाम के लिए विशेष आस्था रेल यात्रा का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून के हर्रावाला रेलवे स्टेशन से वेरावल (सोमनाथ) के लिए रवाना हुई विशेष रेल को हरी झंडी दिखाकर यात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ने का एक ऐतिहासिक अवसर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छह दिवसीय इस विशेष तीर्थ यात्रा में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से लगभग 700 श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। इनमें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने इस पहल के लिए संस्कृति विभाग की सराहना करते हुए सभी यात्रियों की सुरक्षित, सुखद एवं मंगलमय यात्रा की कामना भगवान सोमनाथ और बाबा केदार से की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत के अटूट विश्वास, अदम्य साहस और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक बार विदेशी आक्रमणों और विध्वंस का सामना करने के बावजूद सोमनाथ मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण इस बात का प्रमाण है कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा को कभी पराजित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ प्रत्येक भारतीय को अपनी सभ्यता, संस्कृति और गौरवशाली विरासत का स्मरण कराता है तथा राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाने का माध्यम बनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पुनर्जीवन का अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, केदारनाथ पुनर्निर्माण, महाकाल लोक, बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान और सोमनाथ सहित देशभर के प्रमुख तीर्थस्थलों का व्यापक विकास भारतीय संस्कृति को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थल नहीं होते, बल्कि वे भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के केंद्र हैं। लंबे समय तक उपेक्षित रही धार्मिक धरोहरों को आज पुनः सम्मान और वैश्विक पहचान मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से उत्तराखंड सरकार देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसके तहत केदारखंड और मानसखंड के मंदिर समूहों के विकास एवं सौंदर्यीकरण के साथ-साथ हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार का कार्य तेजी से चल रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को भी प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है, जिससे धार्मिक पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास पर उच्च स्तरीय अध्ययन एवं शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना भी की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इसी दिशा में राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून तथा दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध चलाए गए विशेष अभियान के तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। यह अभियान केवल भूमि को मुक्त कराने का प्रयास नहीं, बल्कि देवभूमि की पवित्रता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का भी अभियान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित की है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया गया तथा मदरसा बोर्ड के स्थान पर उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की गई है, जिससे शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत माध्यम बनाया जा सके।

मुख्यमंत्री ने यात्रा पर रवाना हुए सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे जहां भी जाएं, वहां उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार, विनम्रता और ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा का परिचय दें।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल सोमनाथ के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक यात्री उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सकारात्मक पहचान का प्रतिनिधि बनकर जा रहा है। उन्होंने सभी यात्रियों से अपने व्यवहार, आचरण और विचारों के माध्यम से देवभूमि की गौरवशाली पहचान को और मजबूत करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर विधायक बृज भूषण गैरोला, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, संस्कृति विभाग के अधिकारी, विभिन्न जनप्रतिनिधि, संत समाज के सदस्य तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।