उत्तराखंड में जल्द बनेगा स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (S4C), मुख्य सचिव के निर्देश

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Uttarakhand to Set Up State Cyber Crime Coordination Centre (S4C), CS Anand Bardhan Reviews Cyber Security

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने साइबर अपराधों पर की उच्चस्तरीय समीक्षा, S4C की शीघ्र स्थापना के निर्देश

1930 हेल्पलाइन, ई-जीरो एफआईआर और साइबर पुलिस स्टेशनों को मजबूत बनाने पर जोर, जनजागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश

देहरादून, 13 जुलाई 2026।
उत्तराखंड में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में गृह विभाग एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश में साइबर अपराधों की वर्तमान स्थिति, शिकायतों के निस्तारण, तकनीकी संसाधनों तथा संस्थागत व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्रदेश में स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (S4C) की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि S4C को शीघ्र अधिसूचित (नोटिफाई) कर कार्यशील बनाया जाए ताकि केंद्र, राज्य और जनपद स्तर पर साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच और समन्वय अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके। इससे साइबर अपराध के पीड़ितों को समयबद्ध राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने में भी तेजी आएगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश के सभी साइबर पुलिस स्टेशनों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों, प्रशिक्षित मानवबल तथा आवश्यक उपकरणों से सशक्त बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने साइबर अपराधों की जांच की गुणवत्ता बढ़ाने और मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए तकनीकी क्षमता में निरंतर वृद्धि करने के निर्देश दिए।

बैठक में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में 1930 हेल्पलाइन का रिस्पॉन्स टाइम कम करने के लिए कॉल सेंटर में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई हो सके और धोखाधड़ी की गई धनराशि को समय रहते फ्रीज या रिकवर करने की संभावना बढ़ सके।

उन्होंने प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष बल दिया। निर्देश दिए कि दर्ज होने वाली प्रत्येक ई-जीरो एफआईआर को शत-प्रतिशत नियमित एफआईआर में परिवर्तित किया जाए तथा इस व्यवस्था का क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) के साथ पूर्ण एकीकरण शीघ्र सुनिश्चित किया जाए, जिससे मामलों की निगरानी और जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बन सके।

मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर ठगी के अधिकांश मामलों में पीड़ित जानकारी के अभाव में समय पर शिकायत दर्ज नहीं करा पाते, जिसके कारण वे मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल का लाभ भी नहीं उठा पाते और उनकी धनराशि वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि वह केवल शिकायत प्राप्त होने की प्रतीक्षा न करे, बल्कि प्रो-एक्टिव दृष्टिकोण अपनाते हुए पीड़ितों को आवश्यक मार्गदर्शन एवं सहायता उपलब्ध कराए।

उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण मॉड्यूल (GRM) तथा मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के बारे में आमजन को व्यापक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा जनजागरूकता अभियानों का प्रभावी उपयोग किया जाए। लोगों को यह जानकारी दी जाए कि साइबर ठगी होने पर तत्काल कौन-कौन से कदम उठाने चाहिए, किस माध्यम से शिकायत दर्ज करनी है और धनराशि की वापसी के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं का लाभ कैसे लिया जा सकता है।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायत निवारण मॉड्यूल पर प्राप्त सभी शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कैपेसिटी बिल्डिंग, नियमित तकनीकी प्रशिक्षण तथा साइबर कमांडो की संख्या में वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि नई तकनीकों और बदलते साइबर अपराधों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी. मुरूगेशन, पुलिस महानिरीक्षक डॉ. नीलेश आनन्द भरणे, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह तथा अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।