Silkyara Tunnel Accident: मुख्यमंत्री धामी ने श्रमिक सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

0
6

Silkyara Tunnel Accident: CM Dhami Orders SOP Review, Compensation for Worker’s Family

श्रमिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता, सिलक्यारा हादसे पर मुख्यमंत्री धामी ने जताया गहरा शोक

मृतक के परिजनों को तत्काल मुआवजा और पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक गृह जनपद भेजने के निर्देश

टनल सुरक्षा मानकों और एसओपी की होगी व्यापक समीक्षा, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर जोर

देहरादून।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी जिले की सिलक्यारा टनल में शॉटक्रीट (Shotcrete) का एक हिस्सा गिरने से एक श्रमिक की मृत्यु पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और निर्माण परियोजनाओं में कार्यरत प्रत्येक श्रमिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने बुधवार देर रात सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से घटना की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव ने राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL), जिला प्रशासन तथा संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों के साथ राहत, बचाव एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा बैठक की।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मृतक श्रमिक के परिजनों को नियमानुसार तत्काल आर्थिक सहायता एवं मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। साथ ही मृतक के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान और आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ उसके गृह जनपद भेजा जाए। उन्होंने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।

घटना के कारणों की होगी गहन जांच

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बैठक में हादसे के कारणों की विस्तार से समीक्षा की और अधिकारियों से तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी। उन्होंने निर्देश दिए कि घटना के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष एवं गंभीर जांच कराई जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने सभी तकनीकी एवं सुरक्षा मानकों का पुनर्मूल्यांकन करने तथा टनल निर्माण कार्य में अपनाई जा रही सुरक्षा प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता की समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।

एसओपी में होंगे आवश्यक संशोधन

बैठक के दौरान टनल निर्माण एवं संचालन से संबंधित वर्तमान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की विस्तृत समीक्षा की गई। सचिव ने निर्देश दिए कि वर्तमान परिस्थितियों, संभावित जोखिमों और तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एसओपी का व्यापक पुनरीक्षण किया जाए।

उन्होंने कहा कि संशोधित एसओपी व्यावहारिक, प्रभावी और सभी संबंधित एजेंसियों के लिए स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित, समन्वित एवं सुरक्षित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

संयुक्त निरीक्षण और जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान के निर्देश

सचिव विनोद कुमार सुमन ने जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, अग्निशमन सेवा, आपदा प्रबंधन विभाग, एनएचआईडीसीएल तथा अन्य तकनीकी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए।

उन्होंने टनल के भीतर उन सभी संरचनाओं एवं हिस्सों का विशेष निरीक्षण कराने को कहा, जहां भविष्य में गिरने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका हो सकती है। संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की तत्काल पहचान कर आवश्यक सुरक्षात्मक एवं निवारक उपाय लागू करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि निर्माण कार्य में लगे सभी श्रमिकों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च स्तर पर सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन) प्रकाश चंद्र, जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन) एवं डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश कुमार पुनेठा सहित एनएचआईडीसीएल एवं विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।