Unsafe Building Identification: जर्जर भवनों का होगा तकनीकी सर्वे, डीएम ने दिए चिन्हीकरण के निर्देश

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Dehradun Dilapidated Buildings Survey: DM Ashish Chauhan Issues Directions

जर्जर भवनों के चिन्हीकरण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, डीएम ने दिए सर्वेक्षण के निर्देश

Dehradun DM Ashish Chauhan orders a district-wide survey of dilapidated buildings and directs technical and structural assessment before declaring any building unsafe.

एसडीएम, नगर निगम और नगर पालिकाएं अपने-अपने क्षेत्रों में कराएं जर्जर भवनों का सर्वेक्षण एवं चिन्हीकरण

तकनीकी और संरचनात्मक जांच के बाद ही भवन को घोषित किया जाए जर्जर या गिरासू: जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

देहरादून।
जनपद में जर्जर एवं संभावित रूप से असुरक्षित भवनों से उत्पन्न दुर्घटनाओं और जनहानि के जोखिम को कम करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण एवं चिन्हीकरण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मंगलवार देर शाम वर्चुअल माध्यम से आयोजित बैठक में संबंधित अधिकारियों को जर्जर भवनों की पहचान, तकनीकी जांच और आवश्यक सुरक्षात्मक कार्रवाई को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी भवन को केवल प्रारंभिक निरीक्षण के आधार पर जर्जर अथवा गिरासू घोषित न किया जाए। भवन की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के लिए सभी तकनीकी, संरचनात्मक एवं विधिक पहलुओं की गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य भवन स्वामियों या निवासियों को अनावश्यक परेशानी देना नहीं, बल्कि संभावित दुर्घटनाओं को रोकते हुए जनसुरक्षा सुनिश्चित करना है।

हर क्षेत्र में होगी जर्जर भवनों की पहचान

डीएम ने सभी उप जिलाधिकारियों, नगर निगम तथा नगर पालिका परिषदों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जर्जर और संभावित रूप से असुरक्षित भवनों का सर्वेक्षण एवं चिन्हीकरण प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान भवन की वर्तमान स्थिति, उसकी संरचनात्मक मजबूती, भवन में निवास अथवा व्यवसाय कर रहे लोगों की सुरक्षा तथा आसपास के क्षेत्र पर संभावित प्रभाव जैसे पहलुओं को भी रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। चिन्हित भवनों की व्यवस्थित सूची तैयार कर आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

विशेषज्ञ तकनीकी टीमें करेंगी भवनों का परीक्षण

जिलाधिकारी ने नगर निगम, नगर पालिका परिषदों, लोक निर्माण विभाग (PWD) तथा मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के अधिकारियों को समन्वय से विशेषज्ञ तकनीकी टीमें गठित करने के निर्देश दिए।

इन टीमों के माध्यम से चिन्हित भवनों का तकनीकी एवं संरचनात्मक परीक्षण कराया जाएगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि भवन वास्तव में रहने या उपयोग करने के लिए असुरक्षित है अथवा उसमें आवश्यक मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण की संभावना है।

जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

डीएम डॉ. चौहान ने कहा कि भवन को गिरासू घोषित करने की कार्रवाई में तकनीकी मानकों के साथ-साथ सभी आवश्यक विधिक प्रावधानों का भी पालन किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि संवेदनशील एवं अत्यधिक जर्जर भवनों पर विशेष निगरानी रखी जाए और संभावित दुर्घटना की आशंका होने पर समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाए जाएं।

उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान लगातार बारिश और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों में पुराने एवं कमजोर भवनों के संबंध में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जर्जर भवनों के सर्वेक्षण और चिन्हीकरण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वेक्षण की प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ पूरी की जाए।

वर्चुअल बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजयनाथ शुक्ला, उप जिलाधिकारी मुख्यालय रविंद्र ज्वान्ठा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार, उप जिलाधिकारी ऋषिकेश कुमकुम जोशी, उप जिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढोंडियाल, उप जिलाधिकारी चकराता प्रेमलाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े रहे।