Rare Disease Treatment: आर्थिक तंगी से नहीं रुकेगा बच्चों का इलाज, रेयर डिजीज के 10 मामलों में जिला प्रशासन ने दी मदद

0
11

Dehradun: ₹9.60 Lakh Aid for Rare Disease Treatment of 10 Children

रेयर डिजीज से पीड़ित बच्चों के इलाज में आर्थिक बाधा नहीं बनने देगा जिला प्रशासन, 10 बच्चों के उपचार को ₹9.60 लाख की सहायता

देहरादून, 26 सितंबर 2026। जिले में दुर्लभ एवं गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने आर्थिक सहायता और उपचार की निगरानी को प्राथमिकता दी है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत चिन्हित बच्चों के उपचार, रेफरल, आर्थिक सहायता और चिकित्सकीय प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।

जनपद में अब तक 32 बच्चों को रेयर डिजीज के मामलों के रूप में चिन्हित किया गया है। इनमें से 22 बच्चों का उपचार RBSK के अंतर्गत कराया जा रहा है। वहीं, 10 ऐसे बच्चे चिन्हित किए गए हैं, जो RBSK के दायरे में नहीं आते हैं। इन बच्चों के उपचार में आर्थिक बाधा न आए, इसके लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर CSR फंड से ₹9.60 लाख की धनराशि मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराई गई है। इस धनराशि से संबंधित बच्चों का उपचार कराया जा रहा है।

10 बच्चों के उपचार में जिला प्रशासन ने उपलब्ध कराई आर्थिक सहायता

जिला प्रशासन के सहयोग से प्रेमनगर निवासी 10 वर्षीय उमेश, बैराज निवासी 13 वर्षीय आयशा, डोईवाला निवासी 9 वर्षीय वंशिका, रायपुर निवासी 2 वर्षीय अक्ष, मेहूवाला निवासी 3 वर्षीय आरिस, मांडूवाला निवासी 15 वर्षीय बाबू एवं प्रदीप, मांडूवाला निवासी 20 वर्षीय रंजीत, डोईवाला निवासी 5 वर्षीय शमशाद तथा जोगीवाला निवासी 5 वर्षीय दिव्यांश का उपचार कराया गया है।

इनमें कई बच्चों को सर्जरी के साथ-साथ लंबे समय तक नियमित चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार की आवश्यकता है। गंभीर और दुर्लभ बीमारियों के उपचार के लिए आवश्यकता के अनुसार बच्चों को देश के विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सालयों एवं उच्च चिकित्सा सुविधाओं से युक्त संस्थानों में उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

CSR के साथ राइफल क्लब फंड से भी मिलेगी मदद

रेयर डिजीज के उपचार में कई बार उपचार की लागत अधिक होने के साथ इसकी अवधि भी लंबी होती है। ऐसे में उपचार को निरंतर बनाए रखने के लिए समयबद्ध आर्थिक सहायता जरूरी है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि आवश्यकता के अनुसार CSR फंड के साथ राइफल क्लब फंड से भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी बच्चे का उपचार बाधित न हो।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र बच्चों के उपचार से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। आवश्यक दस्तावेज, चिकित्सकीय रेफरल, अनुमोदन और वित्तीय सहायता से जुड़ी सभी औपचारिकताएं निर्धारित समय-सीमा में पूरी की जाएं।

उन्होंने कहा कि यदि RBSK के तहत उपलब्ध सहायता के बाद भी किसी बच्चे के उपचार के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होती है, तो जिला प्रशासन द्वारा राइफल क्लब फंड से आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

“आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।” — जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान

सभी चिन्हित बच्चों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश

जिलाधिकारी ने कहा कि गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी और शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को सभी चिन्हित बच्चों के मामलों की नियमित मॉनिटरिंग करने तथा उनके अभिभावकों से निरंतर संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए।

बैठक में प्रत्येक बच्चे के उपचार की वर्तमान स्थिति, चिकित्सकीय प्रगति, रेफरल प्रक्रिया, आर्थिक सहायता की उपलब्धता और उपचार से संबंधित अन्य व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय, संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी बच्चे के उपचार में प्रशासनिक या वित्तीय बाधा न आए।

उन्होंने जिले में रेयर डिजीज से पीड़ित बच्चों के निरंतर चिन्हीकरण के निर्देश भी दिए, ताकि कोई भी पात्र बच्चा उपचार एवं आवश्यक सहायता से वंचित न रहे।