डेंगू-मलेरिया को लेकर उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, बरसात में इन सावधानियों का करें पालन

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Uttarakhand Health Advisory: Dengue, Malaria & Disease Prevention

बरसात में बढ़ा जल एवं मच्छर जनित रोगों का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

Uttarakhand Health Department issues monsoon advisory amid risks of dengue, malaria and water-borne diseases, urging safe water, hygiene and mosquito control.

डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता पर जोर

देहरादून, 08 सितंबर 2026।
मानसून के दौरान जल जनित और मच्छर जनित संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ने को देखते हुए उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने आमजन के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। विभाग ने लोगों से सुरक्षित पेयजल का इस्तेमाल करने, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने और घरों व आसपास मच्छरों के पनपने वाले स्थानों को खत्म करने की अपील की है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बरसात के मौसम में डायरिया, पेचिश, टायफायड, हैजा, पीलिया और हेपेटाइटिस जैसे जल जनित रोगों के साथ-साथ डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे मच्छर जनित रोगों की आशंका भी बढ़ जाती है। इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) के माध्यम से प्राप्त साप्ताहिक रिपोर्टों को ध्यान में रखते हुए विभाग ने लोगों से आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।

बासी और खुले खाद्य पदार्थों से करें परहेज

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बासी भोजन, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और अधपके भोजन का सेवन न करने की सलाह दी है। तरबूज, खरबूज, गन्ने का रस और अन्य खाद्य-पेय पदार्थों का सेवन केवल उनकी स्वच्छता और सुरक्षित होने की स्थिति में ही करने को कहा गया है।

विभाग ने ठंडी खाद्य सामग्री और पेय पदार्थों में इस्तेमाल होने वाली बर्फ को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। दूषित पानी से बनी बर्फ संक्रमण का कारण बन सकती है।

उबला हुआ और सुरक्षित पानी ही पिएं

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पीने और खाना बनाने के लिए अच्छी तरह उबले हुए सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। पानी को क्लोरीनयुक्त करने के लिए क्लोरीन की गोलियों का प्रयोग केवल स्वास्थ्य कर्मियों के निर्देश के अनुसार करने को कहा गया है।

इसके अलावा, शौचालय के इस्तेमाल के बाद और भोजन करने से पहले साबुन से हाथ धोने, फलों एवं सब्जियों को अच्छी तरह साफ करने तथा भोजन को ढककर रखने की सलाह दी गई है।

डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए घर में न जमा होने दें पानी

स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से बचाव के लिए घरों और आसपास पानी जमा न होने देने पर विशेष जोर दिया है। विभाग ने पानी की टंकियों और जल भंडारण के बर्तनों को हमेशा ढककर रखने की सलाह दी है।

गमलों के नीचे पानी जमा करने वाली ट्रे न लगाने और गमलों में भी पानी जमा न होने देने को कहा गया है। कूलर, फ्रिज के पीछे, गुलदस्तों, मनी प्लांट, पानी के बर्तनों और अन्य ऐसे स्थानों की नियमित सफाई करने की सलाह दी गई है, जहां पानी एकत्रित हो सकता है।

इन स्थानों पर जमा पानी को कम से कम सप्ताह में एक बार पूरी तरह खाली कर बर्तनों और संबंधित स्थानों को सुखाने की सलाह दी गई है।

पुराने बर्तन और कबाड़ खुले में न छोड़ें

स्वास्थ्य विभाग ने पुराने टूटे बर्तन, बोतल, डिब्बे, बेकार टायर और अन्य कबाड़ को खुले में न फेंकने की अपील की है। इनमें बारिश का पानी जमा होने से एडीज मच्छर के प्रजनन की संभावना बढ़ सकती है, जो डेंगू फैलाने वाला प्रमुख मच्छर है।

मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करने, आवश्यकता के अनुसार मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल करने और शरीर को अधिक से अधिक ढकने वाले कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। बच्चों को भी मच्छर जनित रोगों से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया है।

तेज बुखार समेत ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की है। तेज बुखार, सिरदर्द, बदन या मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द और शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने को कहा गया है।

विभाग के अनुसार, ये लक्षण डेंगू सहित अन्य संक्रामक रोगों से जुड़े हो सकते हैं। लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के स्वयं कोई दवा न लेने की भी सलाह दी गई है।

सरकारी अस्पतालों में डेंगू की जांच निःशुल्क

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि डेंगू की जांच सभी सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर लोगों को अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी अस्पताल में जाकर चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक जांच कराने की सलाह दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि मानसून के दौरान स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, खाद्य पदार्थों की स्वच्छता और मच्छरों की रोकथाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर जल एवं मच्छर जनित संक्रामक रोगों से बचाव किया जा सकता है।