Uttarakhand will prepare disaster management plans for all government and private schools, with six dedicated teams for warning, evacuation, first aid, fire safety and rescue.
हर स्कूल का बनेगा आपदा प्रबंधन प्लान, आपदा से निपटने के लिए गठित होंगी विशेष टीमें
यूएसडीएमए और शिक्षा विभाग ने तैयार की रणनीति, चेतावनी से लेकर खोज-बचाव तक की होगी समग्र व्यवस्था
देहरादून। उत्तराखंड के सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों को आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक के निर्देशों के क्रम में प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय का स्कूल आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें विद्यालय की स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, संभावित आपदा जोखिमों और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एवं बचाव की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
इस संबंध में शुक्रवार को सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के अधिकारियों तथा प्रदेश के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यालयों में आपदा के दौरान त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं और विद्यालय स्टाफ की सुरक्षा के लिए आवश्यक तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि प्रत्येक विद्यालय का आपदा प्रबंधन प्लान उसकी स्थानीय परिस्थितियों और संभावित जोखिमों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके लिए विद्यालय स्तर पर स्थानीय आपदा जोखिमों का आकलन किया जाएगा और उसके अनुरूप सुरक्षा, निकासी, प्राथमिक उपचार, संचार तथा खोज-बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए शिक्षा विभाग और यूएसडीएमए की संयुक्त समिति गठित की जाएगी।
स्थानीय आपदा जोखिमों की होगी पहचान
स्कूल आपदा प्रबंधन प्लान के तहत विद्यालय और उसके आसपास के क्षेत्रों में संभावित जोखिमों का विस्तृत चिन्हांकन किया जाएगा। इनमें भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमपात, हिमस्खलन, आग तथा अन्य स्थानीय आपदाएं शामिल होंगी।
आपदा की स्थिति में विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए स्पष्ट निकासी मार्ग निर्धारित किए जाएंगे। प्रत्येक कक्षा और भवन के लिए निकासी व्यवस्था तथा सुरक्षित स्थान चिन्हित किए जाएंगे। विद्यालय परिसर में आपदा के दौरान सभी विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों के एकत्रित होने के लिए सुरक्षित स्थान भी निर्धारित किया जाएगा।
इसके साथ ही आपदा के समय किस अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी अथवा विद्यार्थी की क्या भूमिका होगी, इसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रधानाचार्य, शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और आवश्यकता के अनुसार विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के अनुरूप दायित्व सौंपे जाएंगे।
आपातकालीन नंबर और फर्स्ट एड की होगी व्यवस्था
विद्यालयों में पुलिस, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग, राज्य एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, तहसील प्रशासन तथा अन्य संबंधित विभागों के महत्वपूर्ण आपातकालीन संपर्क नंबर उपलब्ध एवं प्रदर्शित किए जाएंगे।
प्रत्येक विद्यालय में फर्स्ट एड किट, प्राथमिक उपचार की आवश्यक व्यवस्था और आपदा राहत एवं बचाव सामग्री उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा। विद्यार्थियों एवं विद्यालय स्टाफ को भूकंप, आग, भूस्खलन और अन्य संभावित आपदाओं के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षित प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी।
आपदा प्रबंधन प्लान को केवल कागजी व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए समय-समय पर मॉक ड्रिल आयोजित कर इसकी व्यवहारिकता भी परखी जाएगी। मॉक ड्रिल के माध्यम से निकासी, चेतावनी, प्राथमिक उपचार और बचाव व्यवस्था में सामने आने वाली कमियों की पहचान कर उनमें सुधार किया जाएगा।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अलग निकासी व्यवस्था
सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को भी आपदा प्रबंधन योजना में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। उनके सुरक्षित और त्वरित निकासी के लिए आवश्यक सहायता एवं विशेष व्यवस्थाओं की पहले से पहचान की जाएगी।
विद्यालय भवन, कक्षाओं, विद्युत व्यवस्था, गैस एवं रसोई, पानी की टंकियों, प्रयोगशालाओं, खेल मैदान तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा का परीक्षण किया जाएगा। संभावित खतरों की पहचान कर उन्हें कम करने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
इसके अलावा आपदा की स्थिति में विद्यालय और अभिभावकों के बीच प्रभावी संचार व्यवस्था विकसित की जाएगी। स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायत, स्थानीय समुदाय तथा उपलब्ध स्थानीय संसाधनों को भी आवश्यकता के अनुसार विद्यालय की आपदा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
स्कूलों में गठित होंगी छह विशेष आपदा प्रबंधन टीमें
प्रत्येक विद्यालय के आपदा प्रबंधन प्लान के तहत अलग-अलग जिम्मेदारियों के लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा। इनमें—
- चेतावनी एवं सूचना टीम
- निकासी टीम
- प्राथमिक उपचार टीम
- अग्नि सुरक्षा टीम
- खोज एवं बचाव टीम
- सहायता एवं मनोसामाजिक सहयोग टीम
शामिल होंगी।
इन टीमों के माध्यम से आपदा की स्थिति में विद्यालय स्तर पर तत्काल, व्यवस्थित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विशेष रूप से बच्चों को उनकी आयु, क्षमता और समझ के अनुरूप जिम्मेदारियां दी जाएंगी। शिक्षक एवं विद्यालय स्टाफ इन टीमों को आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करेंगे।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल आपदा के समय सुरक्षित निकालना ही नहीं, बल्कि उन्हें आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सुरक्षा, प्राथमिक प्रतिक्रिया और सामूहिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक एवं सक्षम बनाना भी है।
बैठक में एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, डीजी शिक्षा आकांक्षा कोण्डे, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, डॉ. पीडी माथुर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।








