देवीधुरा में फलों-फूलों से खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल, लाखों श्रद्धालुओं ने देखा अनूठा पाषाण युद्ध

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Devidhura Bagwal Festival: Historic Fruit and Flower Battle

देवीधुरा में फलों-फूलों से खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल, लाखों श्रद्धालु बने पाषाण युद्ध के साक्षी

 

चम्पावत, 28 अगस्त 2025।
चम्पावत के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम, देवीधुरा में रक्षाबंधन के पावन अवसर पर शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। आस्था, लोक संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक सहभागिता से सराबोर इस आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं ने सदियों पुरानी बग्वाल परंपरा और अनूठे पाषाण युद्ध का साक्षी बनने का अवसर प्राप्त किया।

बग्वाल मेले में प्रतिभाग करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक छोलिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने स्वागत समारोह में लोक संस्कृति के रंग भर दिए।

मुख्यमंत्री ने माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए प्रार्थना की कि माँ वाराही की कृपा सभी पर बनी रहे।

विकास के साथ विरासत संरक्षण पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध बग्वाल मेले को उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, गहरी आस्था और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के तहत कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों का विकास एवं कायाकल्प किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के अनुसार देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इसके अलावा घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट और लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण कार्य पूरा किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण के लिए 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना पर कार्य किया जा रहा है। पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर और डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से जुड़े विकास कार्य भी गतिमान हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना और सौंदर्यीकरण के क्षेत्र में 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की घोषणा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। उन्होंने देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण शीघ्र कराने की बात भी कही।

उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित किए जाने से इसकी गरिमा बढ़ी है और मेले की व्यवस्थाओं को भी अधिक सुदृढ़ किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन का उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और रोजगार तथा स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है। उन्होंने युवाओं सहित प्रदेशवासियों से अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।

उन्होंने ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए प्रदेश को विकास के नए आयामों तक पहुंचाया जाएगा।

चार खाम और सात थोक के बीच हुई ऐतिहासिक बग्वाल

देवीधुरा की बग्वाल परंपरा चार खाम और सात थोक के बीच होने वाले अनूठे पाषाण युद्ध के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री ने भी इस ऐतिहासिक आयोजन का अवलोकन किया।

पाटी विकासखंड स्थित माँ वाराही धाम में प्रधान पुजारी की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खामों—वालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला)—के बग्वाली मैदान में पहुंचे।

पारंपरिक परिधानों और रंग-बिरंगी पगड़ियों से सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ।

इस दौरान बग्वाल मैदान फलों और फूलों की बरसात से सराबोर हो गया। इस वर्ष बग्वाल दोपहर 1:48 बजे शुरू होकर 1:55 बजे तक, करीब आठ मिनट चली। फल और फूलों के प्रयोग से सदियों पुरानी इस अनूठी परंपरा को जीवंत रखा गया।

पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फलों और फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है। खामों के आगमन और बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी भी पीठाचार्य कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।

बग्वाल के बाद योद्धाओं का भाईचारा बना संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि माँ वाराही सबकी चिंता करती हैं और देवीधुरा की बग्वाल एक ऐसी अनूठी विरासत है, जिसे इस रूप में केवल बग्वाल मैदान में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, क्योंकि बग्वाल के बाद सभी योद्धा एक-दूसरे से गले मिलते हैं।

रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बच्चियों और महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधी और पर्व की शुभकामनाएं दीं।

ऐतिहासिक बग्वाल मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद रहे। धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति से ओतप्रोत इस आयोजन ने एक बार फिर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया।