हर कार्य की तय होगी समय-सीमा; विकास प्राधिकरणों के काम में देरी बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री

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CM Pushkar Singh Dhami directs Uttarakhand development authorities to fast-track projects, repair roads in 15 days and complete beautification by October 15.

 

विकास प्राधिकरणों के काम में देरी बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री धामी, हर कार्य की तय होगी समय-सीमा

15 अक्टूबर तक बड़े स्तर पर पूरे हों सौंदर्यीकरण कार्य; 15 दिन में प्राधिकरण क्षेत्र की सड़कें दुरुस्त करने के निर्देश

हर विकास प्राधिकरण में बनेगा Illegal Construction Monitoring Dashboard, GIS-ड्रोन से होगी अवैध निर्माण की निगरानी

शहरों में सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट अनिवार्य; पार्किंग समस्या के समाधान के लिए MDDA-हरिद्वार प्राधिकरण तैयार करेंगे ठोस कार्ययोजना

 

देहरादून, 2 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मास्टर प्लान, विकास परियोजनाओं, सड़क सुधार, सौंदर्यीकरण, पार्किंग, आवासीय योजनाओं और अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने के साथ संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को मुख्यमंत्री आवास में आवास विभाग के नियंत्रणाधीन सभी विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने प्राधिकरणों की विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रत्यक्ष लाभ और प्रभाव धरातल पर दिखाई दे।

लंबित मास्टर प्लान और परियोजनाओं में तेजी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान और अन्य विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लंबित कार्य की वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर उसे पूरा करने की समय-सीमा निर्धारित की जाए। निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने कहा कि विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसलिए परियोजनाओं में अनावश्यक प्रक्रियात्मक देरी को समाप्त करते हुए समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

15 अक्टूबर तक पूरा हो सौंदर्यीकरण अभियान

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विकास प्राधिकरण अपने-अपने क्षेत्रों में इसी माह से व्यापक स्तर पर सौंदर्यीकरण कार्य शुरू करें और 15 अक्टूबर तक निर्धारित कार्य पूरे किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सौंदर्यीकरण कार्यों की गुणवत्ता और स्वरूप आकर्षक होने चाहिए तथा इनमें G20 समिट के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों की तरह बेहतर प्लानिंग और प्रभावी क्रियान्वयन दिखाई देना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बजट की आवश्यकता होने पर उसकी व्यवस्था की जाए, लेकिन धनराशि की कमी को कार्य में देरी का कारण नहीं बनने दिया जाएगा।

15 दिन में प्राधिकरण क्षेत्र की सड़कें हों दुरुस्त

मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति पर भी नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने सभी प्राधिकरण क्षेत्रों की सड़कों का सर्वे कर उनकी स्थिति का आकलन करने और खराब सड़कों की प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराने को कहा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी सड़कों को बेहतर स्थिति में लाया जाए। सड़क सुधार कार्यों की नियमित गुणवत्ता जांच और मॉनिटरिंग भी सुनिश्चित करने को कहा गया।

प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों का डेटा 15 दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी जनपदों में योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों की विस्तृत सूची तैयार कर 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि आवास योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचना चाहिए और इसकी नियमित समीक्षा की जानी आवश्यक है।

हर शहर में सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट होंगे अनिवार्य

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी शहरों में सिटी पार्क विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य टॉयलेट के साथ पिंक टॉयलेट की सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए।

शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का लगभग 70 प्रतिशत पूरा करने को कहा।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा जाए।

ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति प्रणाली को बनाया जाए और प्रभावी

मुख्यमंत्री ने भवन मानचित्र स्वीकृति की ऑनलाइन व्यवस्था को सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों से प्रभावी रूप से एकीकृत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अधिक से अधिक सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं।

अवैध निर्माण पर शुरुआती स्तर से होगी निगरानी

अवैध निर्माण के मामलों में मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि निर्माण पूरा होने या विवाद बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय शुरुआत में ही संदिग्ध निर्माण की पहचान की जाए।

इसके लिए GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक की मदद से अवैध निर्माण की समय रहते पहचान कर प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण के मामलों में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

हर विकास प्राधिकरण में बनेगा Illegal Construction Monitoring Dashboard

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard विकसित करने के निर्देश दिए। इसमें संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण, नोटिस जारी करने, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक प्रत्येक कार्रवाई की रियल टाइम स्थिति दर्ज की जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

Citizen-Friendly हों विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट

मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को अधिक सरल और नागरिक-केंद्रित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वेबसाइट पर योजनाओं, भवन मानचित्र स्वीकृति, शुल्क, नियमों और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी आसानी से मिलनी चाहिए।

उन्होंने प्रस्तावित चैटबॉट की प्रगति की जानकारी लेते हुए तकनीक आधारित नागरिक सेवाओं का अधिकतम उपयोग करने को कहा।

पार्किंग समस्या के स्थायी समाधान की कार्ययोजना

देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में बढ़ती पार्किंग समस्या को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने पर्याप्त पार्किंग सुविधा से वंचित नगर निकायों को चिन्हित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने MDDA और HRDA को संबंधित नगर निकायों के साथ समन्वय कर मल्टी-लेवल पार्किंग, सरफेस पार्किंग, पेरीफेरल पार्किंग और PPP मॉडल के आधार पर ठोस कार्ययोजना तैयार करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए पार्किंग की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पार्किंग परियोजनाओं की योजना तैयार की जाए।

आवासीय परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में चल रही आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक परियोजना की स्थिति, पूर्ण हो चुके आवासों और निर्माणाधीन आवासों का स्पष्ट विवरण तैयार करने के निर्देश दिए।

जहां परियोजनाओं की गति धीमी है, वहां आवश्यक कार्रवाई कर कार्य में तेजी लाने को कहा गया।

पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में प्रक्रियाओं में एकरूपता पर जोर

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास प्राधिकरणों में नक्शा स्वीकृति, अवैध निर्माण, विकास शुल्क, मास्टर प्लान और प्रवर्तन से संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जहां संभव हो, प्रक्रियाओं में एकरूपता लाई जाए।

उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि नागरिकों को विकास प्राधिकरणों से जुड़ी सेवाओं के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था मिल सके।

2-3 विकास क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में Land Pooling

मुख्यमंत्री ने Land Pooling Scheme को लेकर भी अधिकारियों को कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कम से कम 2 से 3 विकास क्षेत्रों में लैंड पूलिंग योजना लागू करने की संभावनाओं पर काम किया जाए।

उन्होंने भूमि मालिकों और किसानों को मिलने वाले लाभ का स्पष्ट एवं पारदर्शी मॉडल तैयार करने और उन्हें योजना की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास योजनाओं में भूमि मालिकों के हितों और भविष्य के लाभों को स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में भी बढ़ें नागरिक सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों में भी नागरिक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।

स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के समन्वय से स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का लाभ शहरों के साथ-साथ प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों के लोगों तक भी पहुंचना चाहिए।

पारदर्शिता और जवाबदेही सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी की कोई गुंजाइश नहीं है। प्रत्येक कार्य की समय-सीमा निर्धारित कर उसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए और लापरवाही या अनावश्यक विलंब पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।