राजस्व न्यायालयों के लंबित वादों पर डीएम सख्त, 15,540 मामलों के त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश

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15,540 Revenue Cases Pending in Dehradun, DM Orders Speedy Disposal

राजस्व न्यायालयों के लंबित वादों पर डीएम सख्त, 15,540 मामलों के त्वरित निस्तारण के निर्देश

Dehradun DM Dr Ashish Chauhan reviews 15,540 pending revenue cases and directs speedy disposal, smart monitoring and accountability.

पुराने वादों के निस्तारण को प्राथमिकता, निर्विवाद विरासतन मामलों का युद्धस्तर पर निस्तारण करने के निर्देश

लंबित वादों और शासन व न्यायालय संदर्भित मामलों की सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग व्यवस्था होगी विकसित

 

देहरादून, 24 सितंबर 2026। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित वादों के निस्तारण को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। बुधवार देर शाम ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों, न्यायालयों से संबंधित प्रकरणों तथा शासन स्तर से संदर्भित मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी वादों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा के बावजूद किसी भी वाद को बिना ठोस एवं उचित कारण के अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।

पुराने वादों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश

जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने न्यायालयों में लंबित वादों की नियमित समीक्षा करें और पुराने प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करें। उन्होंने प्रभावी पैरवी और नियमित कोर्ट कर लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने को कहा।

समीक्षा के दौरान उप जिलाधिकारी एवं तहसीलदार न्यायालयों में धारा 166/167 के अंतर्गत 3 से 5 वर्ष पुराने 82 वाद लंबित पाए गए। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को इन प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने वादों के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार कर उसकी नियमित समीक्षा सुनिश्चित करने को कहा।

जिले में 15,540 राजस्व वाद लंबित

राजस्व वादों की समग्र समीक्षा के दौरान जिले में 15,540 वाद निस्तारण हेतु लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निरंतर कोर्ट कर लंबित वादों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि पुराने मामलों को प्राथमिकता से लिया जाए और प्रत्येक राजस्व न्यायालय में लंबित मामलों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। निर्धारित प्रक्रिया के तहत निस्तारण योग्य किसी भी प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

धारा 229बी और 176 के मामलों की भी समीक्षा

धारा 229बी के वादों की समीक्षा के दौरान 841 मामले निस्तारण हेतु लंबित पाए गए। जिलाधिकारी ने इन मामलों का विभागवार एवं न्यायालयवार परीक्षण करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुराने प्रकरणों को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।

वहीं, धारा 176 के वादों की समीक्षा में बताया गया कि अगस्त माह में 13 वादों का निस्तारण किया गया है, जबकि अभी 1,157 वाद लंबित हैं। इनमें 3 से 5 वर्ष पुराने 179 वाद भी शामिल हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को पुराने मामलों के निस्तारण के लिए विशेष प्रयास करने तथा अगली मासिक समीक्षा बैठक में अद्यतन प्रगति रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए।

निर्विवाद विरासतन वादों का युद्धस्तर पर निस्तारण

जिलाधिकारी ने निर्विवाद विरासतन वादों के निस्तारण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में किसी प्रकार का विवाद नहीं है, उन्हें अनावश्यक रूप से लंबित रखने का कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऐसे मामलों का शीघ्र परीक्षण कर नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि आमजन को राजस्व न्यायालयों और कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

न्यायालय और शासन संदर्भित मामलों की भी होगी निगरानी

जिलाधिकारी ने न्यायालयों में लंबित तथा संबंधित विभागों द्वारा अनुपालन किए जाने वाले मामलों की अद्यतन कम्प्लायंस स्थिति तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि न्यायालयों के आदेशों के अनुपालन की नियमित निगरानी की जाए और संबंधित विभागों से समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।

इसी प्रकार मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर से संदर्भित मामलों में की गई कार्रवाई और कम्प्लायंस की अद्यतन स्थिति भी व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम होगा विकसित

जिलाधिकारी ने लंबित वादों और उनके अनुपालन की स्थिति की निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर आधारित स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। प्रस्तावित व्यवस्था में प्रत्येक प्रकरण की वर्तमान स्थिति, लंबित रहने का कारण, संबंधित अधिकारी तथा निस्तारण की निर्धारित समयसीमा जैसी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को एक संगठित एवं प्रबंधन-केंद्रित स्मार्ट सिस्टम के रूप में विकसित किया जाए, ताकि प्रत्येक लंबित प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा सके और समयबद्ध निस्तारण के साथ अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित हो।

जिलाधिकारी ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों का निस्तारण जितना आवश्यक है, उतना ही महत्वपूर्ण उनकी प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित करना भी है। सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली से प्रत्येक प्रकरण की वास्तविक स्थिति तत्काल उपलब्ध हो सकेगी और लंबित रहने के कारणों की पहचान कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

बैठक में अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, उप जिलाधिकारी रविन्द्र ज्वांठा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, उप जिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, उप जिलाधिकारी ऋषिकेश कुमकुम जोशी, संयुक्त निदेशक विधि गिरीश चन्द्र पंचौली, जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गुरू प्रसाद रतूड़ी सहित संबंधित पटल के पटल सहायक उपस्थित रहे।