रिस्पना नदी पुनर्जीवन को नई रफ्तार, डीएम ने बनाई टास्कफोर्स; 7 दिन में मांगा एक्शन प्लान

0
6

रिस्पना नदी पुनर्जीवन: डीएम डॉ. आशीष चौहान ने बनाई टास्कफोर्स, 7 दिन में मांगा एक्शन प्लान | Dehradun News

रिस्पना नदी के पुनर्जीवन को मिली नई गति, डीएम ने गठित कराई टास्कफोर्स; 7 दिन में मांगा विस्तृत एक्शन प्लान

“रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जनसहभागिता से जुड़ा व्यापक पर्यावरणीय मिशन” — डीएम डॉ. आशीष चौहान

देहरादून।

देहरादून की जीवनरेखा मानी जाने वाली रिस्पना नदी के पुनर्जीवन, संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण अभियान को नई गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शनिवार को ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विभिन्न विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपते हुए सात दिनों के भीतर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन केवल सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि जनसहभागिता, पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर बचाने का साझा अभियान है। उन्होंने कहा कि इस मिशन को विभागीय समन्वय, आधुनिक तकनीक और नागरिक सहभागिता के माध्यम से मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाएगा।

जिलाधिकारी ने नगर निगम को निर्देश दिए कि रिस्पना नदी के लगभग 15 किलोमीटर क्षेत्र में गिरने वाले सभी नालों, गार्बेज प्वाइंट्स एवं प्रदूषण के स्रोतों का चिन्हीकरण किया जाए। पूरे नदी क्षेत्र का ड्रोन सर्वे एवं स्ट्रेचवार सर्वेक्षण कर प्रत्येक स्थान पर कूड़े की मात्रा, सफाई की वर्तमान स्थिति तथा आवश्यक कार्यों का विस्तृत आकलन तैयार किया जाए। यह संपूर्ण प्रस्ताव सात दिनों के भीतर प्रशासन को उपलब्ध कराया जाएगा।

सिंचाई विभाग को नदी तटों पर घाट निर्माण, रिवरफ्रंट विकास, सौंदर्यीकरण एवं सार्वजनिक उपयोग के स्थलों की विस्तृत परियोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। वहीं लोक निर्माण विभाग को प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना के अंतर्गत नदी क्षेत्र में आने वाले पिलर्स एवं अन्य संरचनाओं का तकनीकी प्लान प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि विकास कार्यों और नदी संरक्षण के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जा सके।

रिस्पना पुनर्जीवन अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को विभिन्न विभागों के समन्वय से एक विशेष टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश दिए। यह टास्कफोर्स अभियान की नियमित मॉनिटरिंग, समन्वय और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि नदी में कूड़ा फेंकने जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान केवल प्रशासनिक कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए आमजन के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने तथा स्थानीय नागरिकों, स्वयंसेवी संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संस्थाओं एवं जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

नगर पालिका मसूरी को निर्देशित किया गया कि रिस्पना नदी के उद्गम एवं मसूरी क्षेत्र में आने वाले हिस्सों में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार का ठोस या तरल अपशिष्ट नदी में प्रवाहित न होने दिया जाए।

वन विभाग को नदी संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा नदी किनारे हरित पट्टी विकसित करने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।

शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म रणनीति पर होगा कार्य

बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि रिस्पना नदी के पुनर्जीवन के लिए दो स्तरों पर कार्य किया जाएगा।

शॉर्ट टर्म योजना के तहत—

  • नदी एवं आसपास जमा कूड़े का तत्काल निस्तारण।
  • गार्बेज प्वाइंट्स का उन्मूलन।
  • नदी में कूड़ा फेंकने पर प्रभावी रोक।
  • व्यापक जनजागरूकता अभियान।

लॉन्ग टर्म योजना के अंतर्गत—

  • घाट निर्माण एवं रिवरफ्रंट विकास।
  • नदी तटों का सौंदर्यीकरण।
  • हरित पट्टी एवं जैव विविधता संरक्षण।
  • आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास।
  • नदी संरक्षण के लिए स्थायी एवं वैज्ञानिक कार्ययोजना का चरणबद्ध क्रियान्वयन।

जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि रिस्पना नदी का पुनर्जीवन देहरादून की पर्यावरणीय धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जिसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज शर्मा, नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, नगर निगम, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, नगर पालिका मसूरी सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।