चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र: सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद – मुख्यमंत्री धामी

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CM Dhami Reviews Char Dham Yatra 2026 Arrangements, Focus on Safety & Crowd Management

चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र हो ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ : मुख्यमंत्री धामी

श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, मानसून के मद्देनज़र सभी विभाग रहें पूरी तरह सतर्क

रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहे, सख्ती से हो अनुपालन

धामों में क्षमता के अनुरूप दर्शन व्यवस्था के लिए तैयार हो विस्तृत एसओपी, वैज्ञानिक तरीके से हो भीड़ प्रबंधन

होल्डिंग एरिया में भोजन, पेयजल, पार्किंग और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश

देहरादून, 2 जून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा प्रबंधन का मूल मंत्र ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर समन्वय, प्रभावी संचार और सुव्यवस्थित प्रबंधन के माध्यम से यात्रा को और अधिक सुरक्षित, सुचारु एवं सफल बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारों धामों में श्रद्धालुओं की संख्या और क्षमता के अनुरूप दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि रात्रि 10 बजे से प्रातः 4 बजे तक चारधाम यात्रा मार्गों पर वाहनों के आवागमन पर लगाए गए प्रतिबंध का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही ट्रकों एवं अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात्रिकालीन समय में ही संचालन की अनुमति दी जाए तथा दिन के समय इनके संचालन पर रोक बनी रहे।

भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी धाम अथवा प्रमुख पड़ाव पर निर्धारित क्षमता से अधिक भीड़ एकत्रित होती है तो निचले स्तर पर स्थित होल्डिंग एरिया और प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर यात्रियों एवं वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए। भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध एवं वैज्ञानिक व्यवस्था लागू करते हुए श्रद्धालुओं को नियंत्रित तरीके से आगे भेजा जाए ताकि धामों में अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।

उन्होंने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पर्याप्त पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही यात्रियों को केवल रोका ही न जाए, बल्कि उन्हें प्रतीक्षा के कारण, संभावित समयावधि तथा आगे की व्यवस्थाओं की जानकारी भी नियमित रूप से दी जाए।

मुख्यमंत्री ने पुलिस, प्रशासन एवं यात्रा प्रबंधन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को श्रद्धालुओं के प्रति संवेदनशील, विनम्र और सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने के निर्देश दिए।

हर परिस्थिति की जानकारी समय पर मिले यात्रियों को

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल और एफएम रेडियो के माध्यम से निरंतर अद्यतन जानकारी प्रसारित की जाए।

उन्होंने कहा कि मार्ग अवरोध, मौसम में परिवर्तन, यातायात जाम अथवा दर्शन में विलंब जैसी परिस्थितियों की जानकारी भी समय रहते यात्रियों तक पहुंचनी चाहिए, जिससे भ्रम और असंतोष की स्थिति न बने।

मानसून अवधि को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन एवं अन्य विभागों के समन्वित प्रयासों से यात्रा का प्रथम चरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है, लेकिन अब यात्रा अधिक चुनौतीपूर्ण दूसरे चरण में प्रवेश कर रही है, जहां मानसून और प्रतिकूल मौसम बड़ी चुनौती बन सकते हैं। इसलिए यात्रा प्रबंधन को अधिक सतर्कता, नियंत्रण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ संचालित किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को श्रद्धालुओं से प्राप्त शिकायतों, सुझावों एवं फीडबैक की प्रतिदिन समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

आपदा प्रबंधन संसाधन पहले से रहें तैनात

मुख्यमंत्री ने संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस और राहत-बचाव उपकरणों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने को कहा ताकि किसी भी आपात स्थिति अथवा मार्ग अवरोध की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने सभी अधिकारियों को फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं का नियमित निरीक्षण करने और श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

गढ़वाल आयुक्त और आईजी करेंगे नियमित समीक्षा

मुख्यमंत्री ने गढ़वाल आयुक्त एवं आईजी गढ़वाल को चारधाम यात्रा की समस्त व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने तथा श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को यात्रा प्रबंधन की निरंतर निगरानी और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने यात्रा मार्गों पर संचालित होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन सुनिश्चित करने तथा खाद्य पदार्थों की नियमित सैंपलिंग के माध्यम से गुणवत्ता जांच करने के निर्देश भी दिए।

स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने चारों धामों और पैदल यात्रा मार्गों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पैदल मार्गों पर पर्याप्त संख्या में शौचालयों की व्यवस्था और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

गंभीर रूप से बीमार श्रद्धालुओं को शीघ्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हेली एम्बुलेंस सेवा हेतु राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जिलाधिकारी तत्काल समन्वय स्थापित कर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचा सकें।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में शेड स्थापित करने तथा वर्षा एवं तेज धूप से बचाव के लिए बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज एवं भरत चौधरी, विधायक अनिल नौटियाल, राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिला, उत्तराखण्ड अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन सहित वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। वर्चुअल माध्यम से जनप्रतिनिधियों, बदरी-केदार मंदिर समिति के पदाधिकारियों तथा संबंधित जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों ने भी बैठक में सहभागिता की।