Dehradun Rare Disease Treatment: District Administration to Fund Children’s Medical Expenses Beyond RBSK
दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी उठाएगा देहरादून जिला प्रशासन, राइफल क्लब फंड से भी मिलेगी आर्थिक मदद
डीएम डॉ. आशीष चौहान बोले- “आर्थिक अभाव के कारण कोई भी बच्चा इलाज से वंचित नहीं रहेगा”
देहरादून।
जनपद देहरादून में दुर्लभ (रेयर) बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक संसाधनों की कमी किसी भी बच्चे के उपचार में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत मिलने वाली सहायता अपर्याप्त होने की स्थिति में अतिरिक्त खर्च का वहन जिला प्रशासन राइफल क्लब फंड के माध्यम से करेगा।
इसी उद्देश्य से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में जिले में रेयर डिजीज से प्रभावित बच्चों के चिन्हीकरण, उपचार, रेफरल, आर्थिक सहायता और उपचार की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया। डीएम ने सभी संबंधित विभागों को संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने बैठक में जानकारी दी कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत अब तक जनपद में 16 बच्चों की पहचान विभिन्न दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित के रूप में की गई है। इन बच्चों का उपचार देश के विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी एवं विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों में प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि अधिकांश रेयर डिजीज का उपचार अत्यंत महंगा और लंबी अवधि तक चलने वाला होता है, जिसके कारण प्रभावित परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र बच्चे के उपचार से संबंधित सभी प्रक्रियाएं—दस्तावेजों का सत्यापन, शासन स्तर से अनुमोदन, रेफरल, वित्तीय सहायता और अस्पतालों के साथ समन्वय—निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, इसलिए सभी विभाग प्राथमिकता के आधार पर मामलों का निस्तारण करें।
डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि यदि किसी बच्चे के उपचार में आरबीएसके योजना के अंतर्गत उपलब्ध सहायता से अधिक धनराशि की आवश्यकता होती है, तो जिला प्रशासन राइफल क्लब फंड से अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगा। उन्होंने दोहराया कि “आर्थिक अभाव के कारण किसी भी बच्चे का इलाज प्रभावित नहीं होना चाहिए। बच्चों की जिंदगी बचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी मामलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, बच्चों के अभिभावकों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा जाए तथा शासन स्तर पर आवश्यक स्वीकृतियां एवं वित्तीय सहायता समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित कराई जाए।
बैठक में प्रत्येक चिन्हित बच्चे की चिकित्सकीय स्थिति, उपचार की वर्तमान प्रगति, रेफरल प्रक्रिया, उपलब्ध आर्थिक सहायता और भविष्य की आवश्यकताओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय और संवेदनशील कार्यप्रणाली के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी बच्चे के उपचार में प्रशासनिक या वित्तीय बाधा उत्पन्न न हो।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी (बाल विकास) जितेंद्र कुमार तथा स्वास्थ्य एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।





