Kishau Project: Six States Sign Historic MoU Under Amit Shah
किशाऊ परियोजना पर छह राज्यों का ऐतिहासिक MoU, अमित शाह की अध्यक्षता में मिली निर्णायक गति
Six states sign an MoU for the Kishau Multipurpose Project. The project will create a 1562 MCM reservoir and generate 422 MW of power besides supporting irrigation and drinking water needs.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दशकों से लंबित बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन का रास्ता हुआ मजबूत, 422 मेगावाट बिजली उत्पादन और 1562 MCM जलाशय की क्षमता

नई दिल्ली/देहरादून। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली की भागीदारी वाली इस परियोजना के लिए हुआ समझौता लगभग आठ दशकों से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
किशाऊ परियोजना को जल सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, सिंचाई, पेयजल उपलब्धता और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना के क्रियान्वयन से अपर यमुना बेसिन के विभिन्न राज्यों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।
आठ दशक पुरानी परियोजना को मिली नई गति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने MoU पर हस्ताक्षर को किशाऊ परियोजना के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए भारत सरकार और सभी सहभागी राज्य सरकारों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल एक समझौते पर हस्ताक्षर तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग आठ दशकों से प्रतीक्षित परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री के अनुसार किशाऊ परियोजना की परिकल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। इसके बाद विभिन्न स्तरों पर परियोजना को आगे बढ़ाने के प्रयास हुए, लेकिन अनेक कारणों से इसका क्रियान्वयन नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लंबे समय से लंबित महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत किया जा रहा है।
अमित शाह के मार्गदर्शन में दूर हुईं कई अड़चनें
मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में 16 जून 2026 को हुई बैठक में किशाऊ परियोजना से संबंधित कई महत्वपूर्ण विषयों के समाधान का रास्ता तैयार हुआ।
इसके बाद केंद्र सरकार और सहभागी राज्यों के बीच निरंतर समन्वय के माध्यम से परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं पर काम किया गया। अब छह राज्यों के बीच MoU पर हस्ताक्षर होने से परियोजना के क्रियान्वयन को औपचारिक आधार मिला है।
422 मेगावाट बिजली और 1562 MCM जलाशय
किशाऊ परियोजना को केवल बांध निर्माण तक सीमित परियोजना न बताते हुए मुख्यमंत्री ने इसे जल सुरक्षा, ऊर्जा, सिंचाई, पेयजल और यमुना पुनर्जीवन से जुड़ी बहुउद्देशीय परियोजना बताया।
परियोजना के तहत लगभग 1562 MCM क्षमता का जलाशय बनने और 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होने की बात कही गई है। इससे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को भी लाभ मिलने की संभावना है।
परियोजना से अपर यमुना बेसिन में जल उपलब्धता को मजबूत करने के साथ सिंचाई और पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने तथा ऊर्जा उत्पादन में योगदान मिलने की उम्मीद है।
अंतरराज्यीय सहयोग और सहकारी संघवाद का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने किशाऊ परियोजना को केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों के बीच समन्वय तथा अंतरराज्यीय सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा कि परियोजना किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसके लाभ और दायित्व कई राज्यों से जुड़े हैं। ऐसे में केंद्र सरकार और सहभागी राज्यों के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण होगा।
प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता
परियोजना के निर्माण से प्रभावित होने वाले परिवारों के पुनर्वास को उत्तराखंड सरकार ने प्राथमिकता बताया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाते समय प्रभावित परिवारों के हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों का उचित, संवेदनशील और सम्मानजनक पुनर्वास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी। पुनर्वास से संबंधित कार्यों में प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
करीब 2500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने परियोजना से जुड़ी पर्यावरणीय और वन संबंधी चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए लगभग 2500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होगी।
इसके चलते क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भी बड़ी मात्रा में भूमि की आवश्यकता पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड एक वनाच्छादित और पर्वतीय राज्य है, इसलिए इतनी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण चुनौती है।
उन्होंने भारत सरकार और सभी सहभागी राज्यों से क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित करने में उत्तराखंड को सहयोग देने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और वन संबंधी सभी प्रावधानों का नियमानुसार अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सभी सहभागी राज्य किशाऊ परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि MoU पर हस्ताक्षर परियोजना के लिए महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसके क्रियान्वित होने से आने वाली पीढ़ियों को जल, ऊर्जा, सिंचाई और पेयजल के क्षेत्र में दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना के पूरा होने से जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल, विद्युत उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़े प्रयासों को नई गति मिल सकती है। साथ ही अपर यमुना बेसिन से जुड़े राज्यों के विकास में भी इसका दीर्घकालिक योगदान होगा।
सहभागी राज्यों और केंद्रीय मंत्रियों का जताया आभार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित केंद्रीय मंत्रियों, सहभागी राज्य सरकारों तथा बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।





