सोंग नदी के जैविक स्वास्थ्य की जांच के लिए SARRA ने शुरू किया बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट, 36 स्थानों पर होगा सर्वे

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Song River Bioindicator Project Launched by SARRA

 

सोंग नदी के जैविक स्वास्थ्य की जांच के लिए SARRA ने शुरू किया बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट

 

SARRA launches a Song River bioindicator project in Uttarakhand to assess water quality, biodiversity and ecological health across 36 monitoring stations.

 

देहरादून: पूर्वी दून घाटी की प्रमुख जीवनरेखा सोंग नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य का आकलन करने और उसके संरक्षण के लिए स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA), उत्तराखंड ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्राधिकरण के तहत सोंग नदी क्षेत्र में बायो इंडिकेटर प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। इस परियोजना के माध्यम से नदी की जल गुणवत्ता, तटीय आवासों और मानवीय गतिविधियों के प्रभाव का आकलन जैविक संकेतकों के आधार पर किया जाएगा।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के पूर्व वरिष्ठ प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. वी.पी. उनियाल के मार्गदर्शन में यह अध्ययन किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य नदी और उसके आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक आकलन कर एक व्यापक आधारभूत डेटाबेस तैयार करना है। इसके निष्कर्ष भविष्य में नदी संरक्षण और पुनर्जीवन से जुड़ी योजनाओं के निर्माण में उपयोगी होंगे।

 

पांच प्रमुख जीव समूहों से पता चलेगा नदी का स्वास्थ्य

सोंग नदी के जैविक स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए पांच प्रमुख जीव समूहों को अध्ययन में शामिल किया गया है। इन जीवों की मौजूदगी, विविधता और वितरण से नदी के पानी की गुणवत्ता तथा आसपास के पर्यावरण की स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।

  • जलीय मैक्रोइनवर्टेब्रेट्स: पानी में पाए जाने वाले छोटे अकशेरुकी जीव और उनके लार्वा जल प्रदूषण के प्रति संवेदनशील होते हैं। इनकी विविधता से नदी की जल गुणवत्ता का आकलन किया जा सकेगा।

  • तितलियां और जंगली मधुमक्खियां: ये नदी तट पर मौजूद वनस्पति, हरियाली और परागण की स्थिति के महत्वपूर्ण संकेतक हैं।

  • ड्रैगनफ्लाई और डेम्सलफ्लाई (ओडोनाटा): इनकी प्रजातियों की मौजूदगी से जल की गुणवत्ता और नदी किनारे के आवासों की स्थिति का पता लगाने में मदद मिलेगी।

  • पक्षियों की प्रजातियां: नदी घाटी में पाए जाने वाले पक्षियों का अध्ययन पूरे नदी तंत्र और उसके आसपास के आवासों की पारिस्थितिक स्थिति को समझने में सहायक होगा।

     

80 किलोमीटर क्षेत्र में 36 स्थानों पर होगा सर्वेक्षण

इस परियोजना के तहत सोंग नदी के उद्गम स्थल कद्दूखाल, टिहरी से लेकर गंगा नदी में उसके संगम स्थल तेहरी फार्म, देहरादून तक लगभग 80 किलोमीटर के क्षेत्र का अध्ययन किया जाएगा।

सर्वेक्षण को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए नदी क्षेत्र को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। इनमें ऊपरी, मध्य और निचले नदी क्षेत्र शामिल हैं। प्रत्येक क्षेत्र में 12 स्थायी सैंपलिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इस प्रकार कुल 36 स्थानों पर जैविक संकेतकों का अध्ययन किया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत नवंबर से अप्रैल के बीच दो अलग-अलग चरणों में फील्ड सर्वेक्षण किया जाएगा। इसमें मानसून के बाद और मानसून से पहले की स्थितियों का अध्ययन शामिल होगा। दोनों चरणों के आंकड़ों की तुलना से नदी के पारिस्थितिक स्वास्थ्य में होने वाले मौसमी बदलावों को समझने में मदद मिलेगी।

 

सोंग बांध, खनन और शहरीकरण के प्रभावों का होगा आकलन

छह महीने की इस परियोजना से सोंग नदी और उसके आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र का एक व्यापक आधारभूत डेटाबेस तैयार किया जाएगा। यह डेटाबेस नदी की वर्तमान स्थिति को समझने के साथ-साथ भविष्य में होने वाले पर्यावरणीय बदलावों की निगरानी के लिए भी उपयोगी होगा।

अध्ययन के निष्कर्षों से प्रस्तावित सोंग बांध, खनन गतिविधियों और बढ़ते शहरीकरण का नदी की जल गुणवत्ता, जैव विविधता तथा तटीय आवासों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करने में सहायता मिलेगी।

SARRA की यह पहल सोंग नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराएगी। इससे नदी की पारिस्थितिक स्थिति के अनुरूप प्रभावी संरक्षण नीतियां और दीर्घकालिक प्रबंधन योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।