उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाएं होंगी हाईटेक, केंद्र सरकार से मिलेंगे आधुनिक चिकित्सा उपकरण

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उत्तराखंड को 4 MRI, 5 डिजिटल मैमोग्राफी और 75 AI एक्स-रे मशीनें | स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बड़ा तकनीकी विस्तार

उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा हाईटेक आधार, केंद्र से मिलेंगी MRI, डिजिटल मैमोग्राफी और AI-सक्षम एक्स-रे मशीनें

प्रधानमंत्री निधि के अंतर्गत प्रदेश को उपलब्ध होंगी 4 एमआरआई, 5 डिजिटल मैमोग्राफी एवं 75 एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें

दूरस्थ एवं पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचेगी आधुनिक जांच सुविधा, मरीजों को मिलेगा त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार

नई दिल्ली/देहरादून, 29 जून 2026।

उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ एवं तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तराखंड सरकार के बीच सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के माध्यम से प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

समझौते पर उत्तराखंड शासन की ओर से स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडे तथा भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव आराधना पटनायक की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए।

समझौते के तहत प्रधानमंत्री निधि के माध्यम से उत्तराखंड को 4 अत्याधुनिक एमआरआई (MRI) मशीनें, 5 डिजिटल मैमोग्राफी (Digital Breast Tomosynthesis-DBT) मशीनें तथा 75 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इन उपकरणों के माध्यम से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आधुनिक जांच सुविधाओं का उल्लेखनीय विस्तार होगा।

इन चिकित्सा उपकरणों के उपलब्ध होने से मरीजों को विभिन्न गंभीर रोगों की समय पर एवं सटीक जांच की सुविधा मिलेगी। विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान के लिए डिजिटल मैमोग्राफी मशीनें अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी, जबकि एमआरआई मशीनों से न्यूरोलॉजिकल, ऑर्थोपेडिक एवं अन्य जटिल रोगों का बेहतर निदान संभव होगा।

सबसे महत्वपूर्ण पहल के रूप में एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति देंगी। इन मशीनों की सहायता से दूरस्थ गांवों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा मोबाइल मेडिकल इकाइयों के माध्यम से मरीजों की मौके पर ही जांच की जा सकेगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक प्रारंभिक स्तर पर एक्स-रे रिपोर्ट के विश्लेषण में चिकित्सकों की सहायता करेगी, जिससे रोगों की पहचान और उपचार प्रक्रिया अधिक तेज, सटीक एवं प्रभावी बन सकेगी।

इस पहल से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ मरीजों को बड़े शहरों या मेडिकल कॉलेजों तक अनावश्यक रूप से जाने की आवश्यकता भी कम होगी। इससे समय, धन और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखंड के मिशन निदेशक संदीप तिवारी सहित भारत सरकार एवं उत्तराखंड शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने इस पहल को प्रदेश की स्वास्थ्य अवसंरचना को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे राज्य में गुणवत्तापूर्ण एवं तकनीक आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा।