DM Ashish Chauhan Warns NBFCs & Banks Over Loan Irregularities and Poor Borrower Exploitation

एनबीएफसी और बैंकों को डीएम की सख्त चेतावनी, गरीबों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
कर्ज के जाल में फंसाकर किसी गरीब को बेघर किया गया तो होगी कड़ी कार्रवाई: डीएम डॉ. आशीष चौहान
बैंकों को जिले के विकास में निवेश बढ़ाने के निर्देश, बैठक से अनुपस्थित बैंकों को नोटिस जारी करने के आदेश
देहरादून, 25 जून 2026।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जिले में संचालित बैंकों एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि आम जनता, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय या उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जाएगा। गुरुवार को ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित जिला स्तरीय पुनरीक्षण समिति (DLRC) एवं जिला सलाहकार समिति (DCC) की त्रैमासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने बैंकिंग संस्थानों को जनहित सर्वोपरि रखने के निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि बैंक केवल जमा राशि एकत्रित करने तक सीमित न रहें, बल्कि जिले के आर्थिक विकास, स्वरोजगार संवर्धन और स्थानीय निवेश को बढ़ावा देने में भी सक्रिय योगदान दें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जनता को अनावश्यक रूप से परेशान करने, ऋण वितरण में देरी करने या मनमानी करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गरीबों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक में जिलाधिकारी ने विशेष रूप से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को संबोधित करते हुए कहा कि ऋण वितरण और वसूली की प्रक्रिया पूरी तरह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों को कर्ज के जाल में फंसाकर उनकी संपत्तियों की नीलामी जैसी स्थितियां उत्पन्न करना अत्यंत गंभीर विषय है।
डीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी गरीब परिवार को ऋण संबंधी अनियमितताओं या अनुचित वसूली प्रक्रियाओं के कारण बेघर होने की नौबत आती है और इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होती है, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक से अनुपस्थित बैंकों पर कार्रवाई के निर्देश
समीक्षा बैठक में कई प्रमुख बैंक प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। बंधन बैंक, इंडसइंड बैंक एवं आईडीएफसी बैंक का कोई प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं हुआ। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी भी अनुपस्थित रहे।
बैठक की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने सभी अनुपस्थित बैंकों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करने के निर्देश दिए और भविष्य में ऐसी लापरवाही न दोहराने की चेतावनी दी।
एसबीआई के प्रदर्शन पर जताई नाराजगी
बैठक में जिले के क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो की समीक्षा के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर पाया गया। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार जिले में एसबीआई का सीडी रेशियो मात्र 21.73 प्रतिशत रहा, जबकि कृषि क्षेत्र में निर्धारित 277.50 करोड़ रुपये के ऋण लक्ष्य के मुकाबले केवल 28.53 प्रतिशत ऋण वितरण ही किया जा सका।
इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जिले के लोगों की जमा पूंजी का लाभ स्थानीय विकास एवं आर्थिक गतिविधियों को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो बैंक स्थानीय स्तर पर पर्याप्त निवेश नहीं करेंगे, उन्हें प्रशासनिक सहयोग मिलने में कठिनाई हो सकती है। वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वाले बैंकों को प्रशासन द्वारा हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।
स्वरोजगार योजनाओं में लंबित आवेदन तत्काल निस्तारित करने के निर्देश
डीएम ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना तथा राष्ट्रीय ग्रामीण एवं शहरी आजीविका मिशन जैसी योजनाओं के अंतर्गत लंबित ऋण आवेदनों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखे जाने चाहिए। यदि किसी आवेदन को अस्वीकृत किया जाता है तो बैंक को आवेदक को स्पष्ट एवं लिखित कारण बताना होगा, ताकि वह आवश्यक सुधार कर पुनः आवेदन कर सके।
इसके साथ ही बैंकों को लंबित ऋण वसूली मामलों के समाधान हेतु संबंधित तहसीलों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश भी दिए गए।
जिले का सीडी रेशियो बढ़ा, फिर भी छह बड़े बैंक मानक से नीचे
बैठक में लीड बैंक अधिकारी संजय भोटिया ने बताया कि मार्च 2026 तक देहरादून जिले का औसत क्रेडिट-डिपॉजिट रेशियो 42.69 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो दिसंबर तिमाही की तुलना में 0.45 प्रतिशत अधिक है।
हालांकि जिले में कार्यरत 32 बैंकों में से छह प्रमुख बैंक—एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, यूको बैंक, आईडीबीआई बैंक तथा बैंक ऑफ बड़ौदा—अब भी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित 40 प्रतिशत के मानक को प्रभावी रूप से प्राप्त नहीं कर पाए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि जिले में स्थापित 921 एटीएम में से 916 एटीएम पूर्णतः कार्यरत हैं तथा 95.98 प्रतिशत आबादी डिजिटल बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान सेवाओं से जुड़ चुकी है।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में लक्ष्य से अधिक उपलब्धि
बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत निर्धारित 650 लाभार्थियों के लक्ष्य के विरुद्ध 751 पात्र आवेदकों को ऋण स्वीकृत एवं वितरित किया जा चुका है, जो योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का सकारात्मक संकेत है।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, लीड बैंक अधिकारी संजय भोटिया, भारतीय रिजर्व बैंक के एलडीओ अवनेश्वर सिंह, नाबार्ड के डीडीएम प्रदीप राम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बैंक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।





