Seemadwar Drain Project: सीमाद्वार नाला परियोजना का डीएम ने किया निरीक्षण, अवैध सड़क कटिंग पर मशीन सीज

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Dehradun DM Inspects ₹14.25 Crore Seemadwar Drain Project, Seizes Machine Over Illegal Road Cutting

अनधिकृत सड़क कटिंग पर जिलाधिकारी की बड़ी कार्रवाई, मशीन सीज; सीमाद्वार नाला पुनर्निर्माण परियोजना का किया स्थलीय निरीक्षण

मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत ₹14.25 करोड़ की सीमाद्वार नाला पुनर्निर्माण परियोजना की डीपीआर का मौके पर परीक्षण
स्थानीय सुझावों के आधार पर अंतिम रूप दी जाएगी परियोजना, मानसून में नियमों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

देहरादून।

देहरादून के सीमाद्वार-शास्त्रीनगर क्षेत्र में वर्षों से बनी जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणा के अनुरूप प्रस्तावित सीमाद्वार नाला पुनर्निर्माण एवं जलनिकासी सुदृढ़ीकरण परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) का बुधवार को जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण कर परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में बिना अनुमति सड़क कटिंग किए जाने का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कार्य रुकवाया, मशीन सीज कराई और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए।

जलभराव से राहत के लिए तैयार होगी आधुनिक जलनिकासी व्यवस्था

संयुक्त निरीक्षण में सिंचाई विभाग, वन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों ने प्रस्तावित परियोजना के प्रत्येक पहलू का मौके पर आकलन किया। निरीक्षण के दौरान नाले की वर्तमान स्थिति, जलग्रहण क्षेत्र, बरसाती जल के प्रवाह, निकासी में आ रही बाधाओं तथा आसपास की आबादी पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया गया।

प्रस्तावित योजना के अनुसार शास्त्रीनगर-सीमाद्वार क्षेत्र में अनुराग नर्सरी के समीप मोटर मार्ग से प्रारंभ होकर एशियन पब्लिक स्कूल के पीछे होते हुए आईटीबीपी के पास स्थानीय नाले तक लगभग 2160 मीटर लंबाई में आरसीसी बैरल नाले का निर्माण किया जाएगा। इसके बाद यह जलधारा चन्द्रबनी के समीप आसन नदी में मिलेगी।

परियोजना के अंतर्गत 2.25 मीटर चौड़े और 2.40 मीटर गहरे बैरल नाले का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 20.08 क्यूमेक निर्धारित की गई है। इसके साथ दोनों ओर सहायक नालियों का निर्माण, यातायात सुविधा से जुड़े आवश्यक कार्य तथा जलनिकासी तंत्र को मजबूत करने के अन्य कार्य भी किए जाएंगे।

स्थानीय सुझावों के आधार पर अंतिम होगी डीपीआर

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि लगभग ₹14.25 करोड़ की लागत से तैयार की जा रही इस परियोजना का उद्देश्य सीमाद्वार क्षेत्र में बरसात के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना को अंतिम स्वीकृति देने से पहले स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित विभागों से प्राप्त सुझावों को डीपीआर में शामिल किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी या व्यावहारिक समस्या न रहे।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना स्थानीय आवश्यकताओं, भविष्य की आबादी और जलनिकासी की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाए।

बिना अनुमति सड़क कटिंग पर तत्काल कार्रवाई

स्थलीय निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में सड़क कटिंग किए जाने की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचे। जांच में पाया गया कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अभाव में सड़क की खुदाई की जा रही थी।

मानसून अवधि में सड़क कटिंग पर लागू प्रतिबंधों को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से कार्य बंद कराने के निर्देश दिए। मौके पर प्रयुक्त मशीन को सीज किया गया तथा संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए विभागीय कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए गए।

सड़क की मरम्मत और जनसुविधाओं की शीघ्र बहाली के निर्देश

जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि क्षतिग्रस्त सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए और नगर निगम के समन्वय से प्रभावित जनसुविधाओं को शीघ्र बहाल किया जाए। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही आमजन के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन सकती है, इसलिए सभी विभाग पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करें।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनहित से जुड़े विकास कार्यों में नियमों की अनदेखी, बिना अनुमति कार्य अथवा प्रशासनिक लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। दोषी अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता महेंद्र सिंह बोरा, अधिशासी अभियंता पुरुषोत्तम, वन विभाग के अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।