Uttarakhand Monsoon Alert: Chief Secretary Orders 24×7 Disaster Preparedness, Reviews SEOC Operations
24×7 अलर्ट मोड में रहें अधिकारी, जनजीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन
मानसून की स्थिति की एसईओसी से विस्तृत समीक्षा, जिलाधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने के निर्देश
बंद सड़कें जल्द खोलने, संवेदनशील क्षेत्रों में मशीनरी तैनात रखने और मौसम अलर्ट अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर
मुख्य निर्देश एक नजर में
- सभी विभाग 24×7 अलर्ट मोड में रहें।
- बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल खोला जाए।
- संवेदनशील स्थानों पर मशीनरी और राहत दल पहले से तैनात रहें।
- नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाए।
- डैम और बैराज से पानी छोड़ने से पहले लोगों और सीमावर्ती राज्यों को सूचना दी जाए।
- बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं की त्वरित बहाली सुनिश्चित हो।
- सैटेलाइट फोन हमेशा सक्रिय रहें और SEOC-DEOC के बीच नियमित संपर्क बना रहे।
- चारधाम, कांवड़ और कैलाश मानसरोवर यात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
- मौसम संबंधी अलर्ट अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
- जिलाधिकारी नियमित फील्ड निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करें।
देहरादून, 6 अगस्त। प्रदेश में लगातार हो रही भारी वर्षा और मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) पहुंचकर राज्यभर की मानसून स्थिति की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभागों को 24×7 अलर्ट मोड में पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करना होगा।
बैठक में मुख्य सचिव ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से प्रदेशभर में वर्षा की स्थिति, नदियों के जलस्तर, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, बंद सड़कों, राहत एवं बचाव कार्यों, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि मौसम की बदलती परिस्थितियों पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात स्थिति में बिना विलंब त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिलों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश
मुख्य सचिव ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र को सभी जनपदों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने विभिन्न जिलाधिकारियों से दूरभाष पर बातचीत कर उनके क्षेत्रों की स्थिति जानी और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
उन्होंने कहा कि वर्षा और भूस्खलन के कारण बंद हुई सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोला जाए ताकि आम नागरिकों और यात्रियों को अनावश्यक परेशानी न हो। साथ ही भूस्खलन संभावित और अति संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलेन और अन्य आवश्यक मशीनरी पहले से तैनात रखी जाए। जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी जलनिकासी सुनिश्चित करने तथा पर्याप्त संख्या में पंप एवं अन्य उपकरण उपलब्ध रखने के भी निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी स्वयं करें संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण
मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड भ्रमण करने और संवेदनशील क्षेत्रों का स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों की निरंतर निगरानी की जाए तथा सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाई जाए।
चारधाम, कांवड़ और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर विशेष फोकस
बैठक में चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा की व्यवस्थाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा मार्गों की स्थिति, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, यात्रियों की संख्या, चिकित्सा सुविधाओं, पेयजल, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा प्रदेश की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि यात्रा का संचालन मौसम की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाए। यदि अत्यधिक वर्षा या मार्ग अवरुद्ध होने जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर भोजन, पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही आगे भेजा जाए।
डैम और बैराज से पानी छोड़ने से पहले दें पूर्व सूचना
मुख्य सचिव ने नदियों के जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी किनारे रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क किया जाए और खतरे की आशंका होने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि डैम और बैराजों से पानी छोड़े जाने से पहले डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पूर्व सूचना देकर सतर्क किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट भेजा जाए ताकि संभावित जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।
संचार, बिजली और पेयजल सेवाओं की शीघ्र बहाली हो
मुख्य सचिव ने कहा कि यदि भारी वर्षा या भूस्खलन के कारण किसी क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होती है तो तत्काल वैकल्पिक संचार प्रणाली सक्रिय की जाए। सभी सैटेलाइट फोन हर समय कार्यशील स्थिति में रहें तथा प्रतिदिन उनके माध्यम से SEOC और DEOC के बीच संपर्क सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि बिजली, पेयजल और संचार सेवाओं की बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता पर की जाए। यदि कहीं भी ये सेवाएं बाधित होती हैं तो अतिरिक्त टीमें तत्काल मौके पर भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर आम जनता को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों को लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे मौसम संबंधी अलर्ट
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिए कि मौसम विभाग द्वारा जारी सभी चेतावनियां और अलर्ट अंतिम छोर पर रहने वाले व्यक्ति तक भी समय पर पहुंचना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर सूचना मिलने से लोग सुरक्षित निर्णय ले सकते हैं और संभावित जनहानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।
उन्होंने राज्य स्तर से लेकर जनपद, ब्लॉक, तहसील और ग्राम स्तर तक सूचना प्रसारण प्रणाली को और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाने के निर्देश दिए, ताकि प्रत्येक नागरिक तक समयबद्ध, विश्वसनीय और प्रभावी मौसम चेतावनी पहुंच सके।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में एससीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, ड्यूटी ऑफिसर कलम सिंह चौहान, भवानी राम आर्या सहित आपदा प्रबंधन से जुड़े अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।





